भारत की आजादी की 80वीं वर्षगांठ के अवसर पर इस बार ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत पहली बार ‘सूर्यपथ तिरंगा’ नाम से एक विशेष पहल शुरू की जाएगी। इसके तहत फिजी से लेकर अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को तक स्थित भारत के 54 उच्चायोग, दूतावास और वाणिज्य दूतावास के जरिए तिरंगे की तस्वीरों का पूर्व से पश्चिम तक अलग-अलग समय क्षेत्रों में डिजिटल रिले किया जाएगा।


अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि 9 से 17 अगस्त तक देशभर में ‘हर घर तिरंगा’ कार्यक्रम के तहत कई विषय आधारित आयोजन किए जाएंगे। इनमें ‘सेल्फी विद तिरंगा’, बाइक रैली, सैन्य बैंड की संगीत प्रस्तुतियां, सामूहिक वंदे मातरम् गायन और एक विशेष पोर्टल के माध्यम से लोगों द्वारा कराओके शैली में वंदे मातरम् गाकर उसकी रिकॉर्डिंग अपलोड करने जैसे कार्यक्रम शामिल होंगे। इन आयोजनों के जरिए वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने का भी उत्सव मनाया जाएगा।
देश के साथ-साथ विदेशों में स्थित भारतीय उच्चायोग, दूतावास और वाणिज्य दूतावास भी इस वार्षिक अभियान में भाग लेंगे। ‘हर घर तिरंगा’ अभियान का पहला आयोजन अगस्त 2022 में भारत की आजादी के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर किया गया था।
‘सूर्यपथ तिरंगा’ होगा विशेष आकर्षण
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने संस्कृति मंत्रालय की ओर से आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि ‘सूर्यपथ तिरंगा’ एक विशेष और बेहद नवोन्मेषी पहल है। यह हमारे राष्ट्रीय ध्वज, सम्मान और गौरव का अनूठे तरीके से उत्सव मनाने का माध्यम बनेगी। उन्होंने बताया कि इस अभियान में भारत के 54 उच्चायोग, दूतावास और वाणिज्य दूतावास शामिल होंगे। इनका चयन विभिन्न देशों के समय क्षेत्र और तकनीकी व्यवस्थाओं को ध्यान में रखकर किया गया है।
जायसवाल ने कहा, “तिरंगे की तस्वीरों का डिजिटल रिले फिजी से शुरू होगा, जो भारत की सबसे पूर्वी राजनयिक मौजूदगी है। इसके बाद यह क्रमशः पश्चिम की ओर बढ़ते हुए सैन फ्रांसिस्को स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास तक पहुंचेगा।” उन्होंने बताया कि फिजी भारत से समय में आगे है। ऐसे में जब वहां भारतीय मिशन में ध्वजारोहण होगा, तब भारत में करीब आधी रात होगी। इसके बाद मिशन एक-एक कर पूर्व से पश्चिम की दिशा में तिरंगे की तस्वीरें अगले मिशन को भेजते जाएंगे।
विदेशों में भी होंगे कई कार्यक्रम
विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारतीय मिशनों ने ‘भारत को जानो’ प्रश्नोत्तरी, प्रदर्शनियां, चित्रकला प्रतियोगिताएं और भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) के सहयोग से गोंड, वारली और मधुबनी जैसी भारतीय कला पर कार्यशालाओं की तैयारी की है। इन कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने की झलक भी देखने को मिलेगी। जायसवाल ने कहा कि हर वर्ष की तरह इस बार भी दुनिया के कई प्रतिष्ठित स्मारकों को भारत के स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर रोशनी से सजाया जाएगा।
वंदे मातरम् के 150 वर्ष पर रहेगा विशेष जोर
केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि इस वर्ष ‘हर घर तिरंगा’ अभियान में वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा और विभिन्न कार्यक्रमों में इसका सामूहिक गायन होगा।
उन्होंने कहा, “देश के अधिकांश लोगों को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ पूरी तरह याद है और वे निर्धारित समय में इसे गा सकते हैं। हम लोगों से अपील कर रहे हैं कि वे वंदे मातरम् का गायन करें और कराओके शैली में इसकी रिकॉर्डिंग ऑनलाइन अपलोड करें। इसका उद्देश्य लोगों को वंदे मातरम् के पूरे पदों से परिचित कराना है।” शेखावत ने आरोप लगाया कि आजादी के बाद तत्कालीन सरकार ने वंदे मातरम् के मूल पदों को खंडित कर दिया था।
विपक्ष ने जताई आपत्ति
विपक्षी दलों का कहना है कि केंद्र सरकार ने राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के बीच तुलना का माहौल बनाने की कोशिश की है। कुछ विपक्षी नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि विभिन्न कार्यक्रमों में वंदे मातरम् का अनिवार्य गायन कराकर लोगों पर “राष्ट्रवाद थोपने” का प्रयास किया जा रहा है।
हाल ही में संसद ने राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित किया है। इसके तहत राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 की धारा 3 में संशोधन कर वंदे मातरम् को भी वही कानूनी संरक्षण दिया गया है, जो अभी तक राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ को प्राप्त था।
इस संशोधन के बाद जानबूझकर राष्ट्रगीत के गायन में बाधा डालना या उसके गायन के दौरान सभा में व्यवधान उत्पन्न करना दंडनीय अपराध होगा। बाद में पत्रकारों से बातचीत में शेखावत ने कहा कि ये कार्यक्रम न केवल देश के भीतर बल्कि दुनिया भर में बसे भारतीयों और भारत के प्रति सम्मान और स्नेह रखने वाले विदेशी नागरिकों के बीच भी उत्साह का संचार करेंगे।
