पंजाब के सीमावर्ती इलाकों में नशा और हथियार तस्करी से जुड़े अपराधियों के तौर-तरीके लगातार बदल रहे हैं। कभी खेतों, ढाणियों और सुनसान ठिकानों से संचालित होने वाला नेटवर्क अब कथित तौर पर ऐसे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की आड़ लेने की कोशिश कर रहा है जहां आम लोगों का नियमित आना-जाना रहता है। हाल के महीनों में ममदोट, कपूरथला और अबोहर में सामने आए मामलों के बाद सुरक्षा एजेंसियां अधिक सतर्क हो गई हैं।
कुछ अहम बातें
- हाल में हुई कार्रवाई के बाद सीमा से सटे गांवों और कस्बों में संचालित सैलूनों सहित अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।
- सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), पंजाब पुलिस और खुफिया एजेंसियों के अनुसार सीमा पार से संचालित तस्करी नेटवर्क लगातार अपने तरीके बदल रहा है।
- पहले जहां ड्रग्स और हथियारों की सप्लाई खेतों, नहरों और सीमावर्ती पगडंडियों के जरिए होती थी, वहीं अब कुछ मामलों में स्थानीय व्यवसायों की आड़ लेने की आशंका की जांच की जा रही है।
- हालांकि एजेंसियां स्पष्ट कर रही हैं कि जांच केवल संदिग्ध मामलों तक सीमित है और इसका अर्थ यह नहीं कि सभी सैलून या अन्य प्रतिष्ठान संदेह के घेरे में हैं।
- हाल की गिरफ्तारियों के बाद फिरोजपुर, फाजिल्का, अमृतसर, तरनतारन, गुरदासपुर और पठानकोट जैसे सीमावर्ती जिलों में संचालित छोटे-बड़े सैलूनों का सत्यापन तेज कर दिया गया है।
- स्थानीय पुलिस इनके रिकॉर्ड जुटा रही है, जबकि संदिग्ध गतिविधियों वाले स्थानों पर निगरानी बढ़ाई गई है।
कस्बों में आधुनिक सैलूनों की संख्या तेजी से बढ़ी
सूत्रों के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में सीमावर्ती गांवों और कस्बों में आधुनिक सैलूनों की संख्या तेजी से बढ़ी है। इनमें से कुछ प्रतिष्ठान ऐसे इलाकों में खुले हैं जहां आबादी अपेक्षाकृत कम है लेकिन देर रात तक गतिविधियां चलने और बाहरी लोगों की आवाजाही संबंधी सूचनाएं समय-समय पर एजेंसियों तक पहुंचती रही हैं। कई बार बीएसएफ की गश्ती टीमों ने देर रात खुले मिले सैलून बंद भी करवाए हैं।
खुफिया एजेंसियों का मानना है कि अपराधी ऐसे स्थानों को प्राथमिकता देते हैं जहां लोगों का आना-जाना सामान्य दिखाई दे और संदेह की संभावना कम रहे। इसी वजह से सैलून, मोबाइल दुकानों, छोटी कॉमर्शियल यूनिटों और अन्य सार्वजनिक प्रतिष्ठानों की गतिविधियों का विश्लेषण भी अब जांच का हिस्सा बनाया गया है।
फिरोजपुर जिले के गजनी वाला, हजारा सिंह वाला, ममदोट, लक्खोके हिठाड़, निहंगा वाला मोड़, भंभा हाजी, हब्बीके, मालीवाड़ा, बारेके और छांगा राय हिठाड़ सहित कई सीमावर्ती गांवों में पिछले कुछ वर्षों में नए सैलून खुले हैं। सुरक्षा एजेंसियां इनमें से कुछ स्थानों की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ संदिग्ध मामलों के आधार पर ईमानदारी से कारोबार करने वाले अधिकांश सैलून संचालकों की छवि प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
हाल के कुछ मामलों ने एजेंसियों की बढ़ाई चिंता
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार हाल के महीनों में सामने आए कुछ मामलों ने एजेंसियों की चिंता बढ़ाई है। ममदोट क्षेत्र में एक सैलून संचालक को दो विदेशी पिस्तौल, दो मैगजीन और छह कारतूस के साथ गिरफ्तार किया गया था। कपूरथला में भी दो सैलून संचालकों को विदेशी हथियारों के साथ पकड़ा गया, जिनका संबंध फिरोजपुर के सीमावर्ती क्षेत्र से बताया गया। इसी तरह अबोहर में एक सैलून पर कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 12 आरोपियों को गिरफ्तार कर चार पिस्तौल, 47 कारतूस और करीब 100 ग्राम हेरोइन बरामद करने का दावा किया। इन घटनाओं के बाद एजेंसियां यह जांच कर रही हैं कि कहीं संगठित गिरोह कुछ व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का इस्तेमाल सुरक्षित ठिकाने के रूप में तो नहीं कर रहे।
लालच देकर नेटवर्क में शामिल करने की कोशिश
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार सीमा पार बैठे तस्कर स्थानीय युवकों को छोटे-छोटे आर्थिक लालच देकर अपने नेटवर्क से जोड़ने की कोशिश करते हैं। ड्रोन के जरिए भेजी गई खेप को अस्थायी रूप से छिपाने, आगे पहुंचाने और संपर्क बनाए रखने के लिए ऐसे लोगों का इस्तेमाल किया जाता है, जो सामान्य जीवन में व्यवसाय या अन्य पेशों से जुड़े होते हैं। इससे जांच एजेंसियों के सामने चुनौती और बढ़ जाती है।
बीएसएफ और पंजाब पुलिस ने सीमा से सटे गांवों में संयुक्त निगरानी बढ़ा दी है। संदिग्ध प्रतिष्ठानों का सत्यापन, देर रात होने वाली गतिविधियों की जांच और बाहरी व्यक्तियों की पहचान पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ग्रामीणों से भी अपील की गई है कि किसी भी असामान्य गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस या बीएसएफ को दें। विशेषज्ञों का कहना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में बदलते अपराध स्वरूप को देखते हुए केवल सीमा पर निगरानी पर्याप्त नहीं होगी। स्थानीय स्तर पर सामाजिक सतर्कता, कारोबार का सत्यापन, सीसीटीवी निगरानी और पुलिस-जन सहयोग को भी मजबूत करना जरूरी है।
तीन कार्रवाई, जिसने बढ़ाई एजेंसियों की चिंता
ममदोट में एक सैलून संचालक से दो विदेशी पिस्तौल, दो मैगजीन और छह कारतूस बरामद हुए। कपूरथला में दो सैलून संचालकों को विदेशी हथियारों के साथ गिरफ्तार किया गया। अबोहर में एक सैलून पर छापेमारी के दौरान 12 आरोपियों को गिरफ्तार कर चार पिस्तौल, 47 कारतूस और करीब 100 ग्राम हेरोइन बरामद की गई। इन मामलों के बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया है।
क्यों बदल रहे हैं अपराधियों के ठिकाने
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार संगठित गिरोह लगातार अपने तौर-तरीके बदल रहे हैं। सार्वजनिक प्रतिष्ठानों में लोगों की सामान्य आवाजाही के कारण संदेह अपेक्षाकृत कम होता है। देर रात तक खुले रहने वाले स्थानों पर गतिविधियां छिपाना आसान माना जाता है। ऐसे स्थान स्थानीय संपर्क बनाने, खेप की अस्थायी आवाजाही और संदेश पहुंचाने के लिए भी उपयोगी हो सकते हैं। इसी कारण अब संदिग्ध व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर भी विशेष निगरानी रखी जा रही है।
इन सीमावर्ती जिलों पर विशेष नजर
हाल की घटनाओं के बाद फिरोजपुर, फाजिल्का, अमृतसर, तरनतारन, गुरदासपुर और पठानकोट में निगरानी बढ़ा दी गई है। पुलिस और बीएसएफ संयुक्त रूप से संदिग्ध गतिविधियों वाले प्रतिष्ठानों का सत्यापन कर रहे हैं। देर रात तक खुले रहने वाले स्थानों, बाहरी लोगों की आवाजाही और संदिग्ध इनपुट की भी जांच की जा रही है।
कुछ मामलों से पूरे कारोबार पर सवाल नहीं
स्थानीय सैलून संचालकों का कहना है कि कुछ आरोपियों की गिरफ्तारी के आधार पर पूरे व्यवसाय को संदेह की नजर से नहीं देखा जाना चाहिए। सीमावर्ती क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोग वर्षों से ईमानदारी से अपना कारोबार चला रहे हैं। उनका कहना है कि जांच केवल संदिग्ध मामलों तक सीमित रहे, ताकि अपराधियों पर कार्रवाई हो और वैध कारोबार करने वालों की साख भी प्रभावित न हो। हाल में हुई गिरफ्तारियों के बाद सीमा से सटे गांवों में संचालित कुछ प्रतिष्ठानों की निगरानी बढ़ाई गई है। बाहरी लोगों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। ग्रामीणों से भी अपील है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत सुरक्षा एजेंसियों को दें।
अबोहर में सैलून से पकड़े गए 12 लोग
अबोहर। हाल ही में अबोहर के एक सैलून में कार्रवाई के दौरान पुलिस ने संचालक समेत 12 लोगों को नशा, अवैध हथियार और कारतूस सहित गिरफ्तार किया था। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आरोपी राजस्थान से हथियार लाकर पंजाब सहित अन्य क्षेत्रों में उनकी सप्लाई करते थे। पुलिस का कहना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में इस तरह की गैरकानूनी गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और इसी सतर्कता के कारण इस गिरोह का पर्दाफाश संभव हुआ।
थाना प्रभारी मनिंदर सिंह के अनुसार सीमावर्ती क्षेत्र में किसी भी प्रकार की गैरकानूनी गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पुलिस लगातार संदिग्ध गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
ममदोट में सैलून संचालक की हथियारों सहित गिरफ्तारी के बाद सीमावर्ती क्षेत्रों में संचालित सैलूनों पर विशेष नजर रखी जा रही है। इससे पहले भी ऐसे मामलों में कार्रवाई हो चुकी है। लगातार सामने आ रहे इनपुट के मद्देनजर पुलिस और खुफिया एजेंसियां संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी बढ़ा रही हैं। जहां भी ठोस सूचना मिल रही है, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। – करण शर्मा, डीएसपी, फिरोजपुर

