किराया नहीं बढ़ता, खर्च लगातार बढ़ रहा
कई गाड़ी चालक 200 से 250 किलोमीटर तक गाड़ी चलाते हैं। सीएनजी महंगी होने का सीधा असर हमारी जेब पर पड़ता है। एप का किराया वही रहता है, लेकिन ईंधन का खर्च बढ़ जाता है। -सुदेश
करीब चार रुपये किलो की बढ़ोतरी छोटी लगती है, लेकिन नोएडा-दिल्ली रूट पर कैब चलाने में कई किलो गैस की खपत होती है। महीने भर का हिसाब लगाएं तो दो हजार रुपये से ज्यादा खर्च करने पड़ेंगे। -अनिल
सीएनजी गाड़ी की ईएमआई, सर्विस और घर का खर्च सब निकालना पड़ता है। किराया नहीं बढ़ रहा, लेकिन खर्च बढ़ता ही जा रहा है। आखिर इसका बोझ चालक ही क्यों उठाएं? -इमरान अहमद
पहले पेट्रोल महंगा था तो सीएनजी को सस्ता विकल्प मानकर गाड़ी ली थी। अब सीएनजी भी लगातार महंगी हो रही है। महीने के अंत में कमाई और खर्च का अंतर कम होता जा रहा है। -उत्सव

ऑटो-टैक्सी हड़ताल की चेतावनी
ईंधन की बढ़ती कीमत और लंबे समय से निर्धारित किराये में संशोधन नहीं होने से नाराज ऑटो-टैक्सी चालक संगठनों ने दिल्ली-एनसीआर में हड़ताल की चेतावनी दी है। अलग-अलग संगठनों ने सात से नौ सितंबर के बीच हड़ताल की घोषणा की है।
यदि सभी संगठन अपने फैसले पर कायम रहते हैं तो दिल्ली-एनसीआर में ऑटो और टैक्सियों की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। संगठनों का दावा है कि करीब एक लाख चालक इसमें शामिल होंगे।
ऑल दिल्ली ऑटो टैक्सी ट्रांसपोर्ट कांग्रेस यूनियन और ऑटो टैक्सी ट्रांसपोर्ट कांग्रेस प्रकोष्ठ ने सात और आठ सितंबर को हड़ताल का आह्वान किया है। संगठन सोमवार को उपराज्यपाल, मुख्यमंत्री, परिवहन मंत्री, परिवहन आयुक्त और दिल्ली पुलिस आयुक्त को इसकी औपचारिक सूचना देंगे। भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) समर्थित ऑटो रिक्शा संघ और दिल्ली प्रदेश टैक्सी यूनियन ने नौ सितंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा की है।
2023 के बाद से ऑटो-टैक्सी किराये में बढ़ोतरी नहीं हुई
चालक संगठनों के अनुसार, ईंधन की बढ़ती कीमतों के अलावा वाहन रखरखाव, बीमा, स्पेयर पार्ट्स और किस्त का खर्च भी बढ़ा है। उनका कहना है कि बढ़ती लागत के बावजूद वर्ष 2023 के बाद से निर्धारित ऑटो-टैक्सी किराये में बढ़ोतरी नहीं हुई है। संगठन मौजूदा लागत के अनुरूप किराये की तत्काल समीक्षा की मांग कर रहे हैं।
कल्याण बोर्ड के गठन की भी मांग
बीएमएस समर्थित संगठनों ने किराया बढ़ाने के अलावा चालक कल्याण बोर्ड के गठन समेत अन्य मांगें भी उठाई हैं। ऑटो रिक्शा संघ और दिल्ली प्रदेश टैक्सी यूनियन के महामंत्री राजेंद्र सोनी के अनुसार, मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री से बैठक के लिए करीब डेढ़ वर्ष से समय मांगा जा रहा है, लेकिन अब तक मुलाकात नहीं हो सकी है।
संगठनों का कहना है कि सरकार ने चालक कल्याण बोर्ड बनाने की घोषणा की थी, पर इसका गठन नहीं हुआ। उनके मुताबिक बोर्ड बनने से चालकों और उनके परिवारों को सामाजिक सुरक्षा तथा विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिल सकेगा।
