देश की राजनीति में बहुत बड़ी हलचल है। दिल्ली में एक बड़ा धमाका हुआ है। लोकसभा सांसद काकोली घोष ने बगावत कर दी है। उन्होंने अपनी ही पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। काकोली घोष ने दावा किया है कि उनके साथ 20 सांसद हैं। इन सभी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की है। उन्होंने एक पत्र सौंपा है। सांसदों ने सदन में अलग बैठने की मांग की है। इस कदम से पश्चिम बंगाल की राजनीति गर्मा गई है। ममता बनर्जी की पार्टी को बहुत बड़ा झटका लगा है। दिल्ली से कोलकाता तक हड़कंप मच गया है।
बंगाल के विकास के लिए बड़ा कदम
काकोली घोष ने अपनी बात साफ रखी है। वे पश्चिम बंगाल का विकास चाहती हैं। इसके लिए वे केंद्र और राज्य सरकार के साथ मिलकर काम करेंगी। उन्होंने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। काकोली घोष ने कहा कि बंगाल में कानून-व्यवस्था खराब है। वहां कुशासन और बेरोजगारी बहुत बढ़ गई है। वे इस बदहाली के खिलाफ लड़ रही हैं। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र दे दिया है। अध्यक्ष ओम बिरला ने उन्हें आश्वासन दिया है। वे समय मिलते ही सांसदों को चर्चा के लिए बुलाएंगे।
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केंद्रीय योजनाओं को रोकने का आरोप
सांसद काकोली घोष ने अपनी लाचारी भी जताई। उन्होंने कहा कि सभी 20 सांसद लोकसभा में काम नहीं कर पा रहे थे। पूरे देश में केंद्र सरकार की योजनाएं चल रही हैं। लेकिन बंगाल में इन्हें लागू नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि जनता ने हमें चुनकर भेजा है। हमें मतदाताओं तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। जनता के हक के लिए यह फैसला जरूरी था।
सिर कटेगा लेकिन झुकेगा नहीं-काकोली घोष
काकोली घोष ने डर और दबाव की बात को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि वे किसी से नहीं डरती हैं। वे यहां बिल्कुल अकेली बैठी हैं। सभी 20 सांसदों ने बैठकर पत्र पर दस्तखत किए हैं। उन्होंने आगे कहा मेरा सर कटेगा लेकिन झुकेगा नहीं। मैंने बहुत सहन किया है। उन्होंने बताया कि वे 2011 में ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री बनने के बाद नहीं आईं। वे 40 साल से राजनीति में संघर्ष कर रही हैं। ऐसे लोगों की बातों का उन पर कोई असर नहीं होता।


