भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने 05 अगस्त को श्रीलंका की आधिकारिक यात्रा की. विदेश सचिव बनने के बाद यह उनकी श्रीलंका की पहली स्वतंत्र आधिकारिक यात्रा थी. इससे पहले वह अप्रैल 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की श्रीलंका यात्रा और अप्रैल 2026 में उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन की श्रीलंका यात्रा के दौरान भारतीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य के रूप में वहां जा चुके हैं.
प्रधानमंत्री से की मुलाकात
यात्रा के दौरान विदेश सचिव ने श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके, प्रधानमंत्री डॉ. हरिनी अमरसूरिया और विदेश मंत्री विजिता हेराथ से मुलाकात की. उन्होंने विदेश सचिव अरुणी रणराजा के साथ भी चर्चा की. विदेश सचिव ने विपक्ष के नेता सजित प्रेमदासा से भी मुलाकात की. श्रीलंकाई तमिल और भारतीय मूल के तमिल (IOT) समुदाय के नेताओं के साथ अलग-अलग बैठकें कीं. श्रीलंका में बैठकों के दौरान विदेश सचिव ने भारत की ‘पड़ोसी पहले’ नीति और ‘विजन महासागर’ के तहत श्रीलंका के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई. दोनों पक्षों ने भारत-श्रीलंका के बीच द्विपक्षीय मुद्दों और चल रही परियोजनाओं की व्यापक समीक्षा की.
लाइन ऑफ क्रेडिट समझौंतो का स्वागत किया गया
दोनों पक्षों ने दितवाह चक्रवात के बाद घोषित 45 करोड़ अमेरिकी डॉलर के पुनर्निर्माण पैकेज सहित विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया. विशेष रूप से रेलवे परियोजनाओं के लिए 25 करोड़ अमेरिकी डॉलर और पशुपालन एवं अन्य प्राथमिक आवश्यकताओं के लिए 10 करोड़ अमेरिकी डॉलर की भारतीय रुपये में नामित दो ऋण सहायता (Line of Credit) पर समझौतों के संपन्न होने का स्वागत किया गया.
भारत के एक्सिम बैंक और श्रीलंका के वित्त मंत्रालय के बीच हुए इन समझौतों का आदान-प्रदान श्रीलंका के राष्ट्रपति की उपस्थिति में श्रीलंका सरकार के ट्रेजरी सचिव और भारत के उच्चायुक्त ने किया. दोनों पक्षों ने यह भी बताया कि 10 करोड़ अमेरिकी डॉलर की अनुदान सहायता के तहत दितवाह पुनर्निर्माण पैकेज में क्षतिग्रस्त घरों के पुनर्निर्माण और स्थायी पुलों के निर्माण का कार्य जल्द शुरू होगा. 13 जुलाई 2026 को हस्ताक्षरित MoU के तहत स्थानांतरित किए गए देनियाया अस्पताल के लिए चिकित्सा उपकरणों की आपूर्ति, श्रीलंका में मेडिकल कियोस्क की आपूर्ति और पूरे द्वीप के शैक्षणिक संस्थानों को उपकरण उपलब्ध कराने में भी प्रगति दर्ज की गई. दोनों पक्ष श्रीलंका में पूरे द्वीप के लिए आपदा चेतावनी प्रणाली को जल्द लागू करने की दिशा में भी काम कर रहे हैं.
इसके अलावा 50 लाख अमेरिकी डॉलर की अनुदान सहायता से उत्तरी रेलवे कॉरिडोर के पुनर्वास का कार्य पूरा होने और रेल सेवाएं फिर से शुरू होने पर भी दोनों पक्षों ने संतोष व्यक्त किया.

दोनों पक्षों ने बिजली ग्रिड इंटरकनेक्शन परियोजना, सम्पूर सौर ऊर्जा परियोजना और त्रिंकोमाली को ऊर्जा केंद्र के रूप में विकसित करने सहित ऊर्जा परियोजनाओं के शीघ्र क्रियान्वयन पर चर्चा की. श्रीलंका की यूनिक डिजिटल आइडेंटिटी परियोजना के लिए निविदा प्रक्रिया जल्द पूरी करने पर भी सहमति बनी.
इसके अलावा 6.15 करोड़ अमेरिकी डॉलर की अनुदान सहायता से लागू होने वाली कंकेसनथुरई बंदरगाह के पुनर्वास और आधुनिकीकरण के लिए समझौता ज्ञापन पर जल्द चर्चा शुरू करने का निर्देश दिया गया.
अप्रैल 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की श्रीलंका यात्रा के दौरान की गई प्रतिबद्धता को याद करते हुए दोनों पक्षों ने 1990 सुवा सेरिया एम्बुलेंस सेवा के विस्तार से जुड़े समझौता ज्ञापन को जल्द अंतिम रूप देने पर सहमति जताई.
पिछले वर्ष प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान घोषित क्षमता निर्माण पहल के पहले वर्ष में श्रीलंका के विभिन्न क्षेत्रों के 1,000 से अधिक पेशेवरों को प्रशिक्षण दिए जाने पर भी दोनों पक्षों ने संतोष व्यक्त किया.
बागान समुदाय के लिए भारतीय आवास परियोजना के चौथे चरण में हालिया प्रगति का उल्लेख करते हुए विदेश सचिव ने श्रीलंका से भारतीय मूल के तमिल (IOT) समुदाय से जुड़ी विभिन्न परियोजनाओं, विशेषकर 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा के दौरान घोषित 10,000 घरों के निर्माण को तेजी से लागू करने का आग्रह किया.
दोनों पक्षों के बीच आर्थिक साझेदारी को और मजबूत बनाने पर भी चर्चा हुई. इस साल जून में हुई प्रारंभिक वार्ता और भारत-श्रीलंका मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की बातचीत को आगे बढ़ाने के निर्णय का स्वागत किया गया. साथ ही भारत-श्रीलंका सामाजिक सुरक्षा समझौते पर वार्ता सफलतापूर्वक पूरी होने पर भी संतोष व्यक्त किया गया. दोनों देशों की आंतरिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद इस समझौते पर जल्द हस्ताक्षर होने की उम्मीद है.
यात्रा के दौरान विदेश सचिव ने मछुआरों से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की और श्रीलंका में हिरासत में लिए गए भारतीय मछुआरों एवं उनकी नौकाओं की शीघ्र रिहाई के लिए सहयोग का अनुरोध किया. उन्होंने कहा कि द्विपक्षीय तंत्र विभिन्न मुद्दों के समाधान की दिशा में काम जारी रखेगा, लेकिन मछुआरों की आजीविका को ध्यान में रखते हुए मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए.
विदेश सचिव ने श्रीलंकाई नेतृत्व से जल्द से जल्द प्रांतीय परिषद चुनाव कराने और तमिल समुदाय की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए श्रीलंका के संविधान के प्रावधानों को पूरी तरह लागू करने की प्रतिबद्धता निभाने का भी आग्रह किया.
उन्होंने दिसंबर 2024 के संयुक्त वक्तव्य में राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके द्वारा दिए गए इस आश्वासन का भी स्वागत किया कि श्रीलंका की भूमि का उपयोग किसी भी तरह भारत की सुरक्षा के विरुद्ध नहीं होने दिया जाएगा. विदेश सचिव ने कहा कि यह आश्वासन भारत और श्रीलंका के बीच सुरक्षा, विकास और समृद्धि पर आधारित व्यापक एवं पारस्परिक रूप से लाभकारी साझेदारी को आगे बढ़ाने की मजबूत नींव है.
विदेश सचिव की इस यात्रा ने दिसंबर 2024 में राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके की भारत यात्रा के दौरान जारी संयुक्त वक्तव्य और अप्रैल 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की श्रीलंका यात्रा के दौरान हुए समझौतों और समझौता ज्ञापनों के अनुरूप दोनों देशों के नेताओं की साझा दृष्टि को लागू करने के प्रति भारत की निरंतर प्रतिबद्धता को एक बार फिर दोहराया.

