लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रेस वार्ता में चुनावी व्यवस्था को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत में लोकसभा और विधानसभा चुनावों में गड़बड़ियां हुई हैं और उनके पास इसे साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं। राहुल गांधी ने कहा कि यह केवल चुनावी प्रक्रिया से जुड़ा मुद्दा नहीं, बल्कि देश के लोकतांत्रिक ढांचे से जुड़ा मामला है।

राहुल गांधी ने कहा कि वह यह बात बिना आधार के नहीं कह रहे हैं। उनके मुताबिक, उनके पास मौजूद जानकारी और सबूत इस बात को 100 प्रतिशत निश्चित करने के लिए पर्याप्त हैं कि भारतीय चुनावों में गड़बड़ी हुई है। उन्होंने विशेष रूप से 2024 के लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनावों का जिक्र किया।
‘वोट खत्म हुआ तो संविधान काम नहीं करेगा’
राहुल गांधी ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोगों के वोट की सुरक्षा करना आयोग की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि अगर वोट की व्यवस्था कमजोर होती है तो संविधान अपनी ताकत खो देता है और उसके बाद कानून तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं पर भी असर पड़ता है।
𝐌𝐫. 𝐆𝐲𝐚𝐧𝐞𝐬𝐡 𝐊𝐮𝐦𝐚𝐫 𝐦𝐮𝐬𝐭 𝐫𝐞𝐬𝐢𝐠𝐧 𝐢𝐦𝐦𝐞𝐝𝐢𝐚𝐭𝐞𝐥𝐲.
🔹We are not going to let democracy be destroyed in India and sit silent, and the people responsible for this are going to be punished.
🔹The two Election Commissioners have done a wise thing, and I… pic.twitter.com/pQnc4wIpkN
— Congress (@INCIndia) September 24, 2026
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग वह संवैधानिक संस्था है, जिसे देश के मतदाताओं के वोट की रक्षा करनी चाहिए। राहुल के मुताबिक, वोट की सुरक्षा में गड़बड़ी केवल चुनाव तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इसका असर पूरे लोकतांत्रिक ढांचे पर पड़ता है।
एंटी-इन्कंबेंसी को लेकर भी उठाए सवाल
राहुल गांधी ने भाजपा के कई राज्यों में लगातार चुनावी प्रदर्शन का जिक्र करते हुए एंटी-इन्कंबेंसी पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि भारत में आमतौर पर सरकारों के खिलाफ एंटी-इन्कंबेंसी का प्रभाव देखने को मिलता है, लेकिन कई राज्यों में यह खत्म होती दिखाई दे रही है। उन्होंने हरियाणा, महाराष्ट्र और गुजरात का उदाहरण दिया। राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें यह समझ नहीं आता कि अलग-अलग राज्यों में एंटी-इन्कंबेंसी कैसे खत्म हो जाती है। इसके बाद उन्होंने इराक और उत्तर कोरिया का उदाहरण देते हुए कहा कि जहां लोकतंत्र नहीं होता, वहां एंटी-इन्कंबेंसी भी नहीं होती।

‘वोट चोरी से कानून चोरी और फिर संस्था चोरी’
राहुल गांधी ने अपने बयान में ‘वोट चोरी’ से लेकर कानून और संस्थाओं तक एक कड़ी का दावा किया। उन्होंने कहा कि अगर किसी चुनाव में वोटों के साथ गड़बड़ी होती है और उसके आधार पर सांसद चुने जाते हैं, तो उनके जरिए बनाए गए कानूनों और किए गए संस्थागत बदलावों पर भी सवाल उठता है। उन्होंने कहा कि वोट चोरी से कानून चोरी और कानून चोरी से संस्था चोरी की स्थिति बनती है। राहुल गांधी ने दावा किया कि आने वाले समय में उनके द्वारा उठाए गए मुद्दे पूरी तरह स्पष्ट हो जाएंगे।
‘चुनाव आयुक्तों ने CEC ज्ञानेश कुमार पर सवाल उठाए’
राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि दो चुनाव आयुक्तों ने ज्ञानेश कुमार के कामकाज और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े फैसलों पर सवाल उठाए हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर कई बार आपत्ति दर्ज की। रिपोर्ट के मुताबिक, इन आपत्तियों में मतदाता सूची, नए मतदाताओं के पंजीकरण और डेटा तक पहुंच जैसे मुद्दे शामिल थे।
हालांकि, चुनाव आयोग ने इन रिपोर्टों में बताए गए मतभेदों को संस्था के कामकाज में टूट के तौर पर पेश किए जाने को खारिज किया है। आयोग का कहना है कि अलग-अलग विचार और टिप्पणियां संस्थागत विचार-विमर्श का हिस्सा हैं और उसके फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
CEC के इस्तीफे की मांग
राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से तत्काल पद छोड़ने की मांग भी की। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग को लोगों के वोट की रक्षा करने की जिम्मेदारी मिली थी, लेकिन चुनावी व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों के कारण इस जिम्मेदारी पर सवाल खड़े हुए हैं। राहुल गांधी ने कहा कि उनके पास ‘वोट चोरी’ को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं और लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने की कोशिश में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल पहले भी सीईसी ज्ञानेश कुमार को लेकर कार्रवाई की मांग कर चुके हैं।

