राम मंदिर में चढ़ावा चोरी:गणनाकर्मियों की ड्रेस, बायोमीट्रिक और तलाशी, बदल दिए थे नियम; बैंक ने दी थी ये सलाह – Ram Mandir Donation Scam Counting Staff Uniforms, Biometrics, And Searches Anil Mishra Had Changed The Rules
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट के पूर्व सदस्य अनिल मिश्रा ने गणनाकर्मियों के लिए बनाए गए नियमों में शिथिलता बरती थी, जिससे चोरी की घटनाओं को अंजाम देना आसान हो गया। पुलिस को इस मामले में कई बैंककर्मियों की मिलीभगत के भी सुबूत मिले हैं।
एसआईटी की प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि अनिल मिश्रा वित्तीय मामलों, नकदी संकलन के प्रबंधन और गणना प्रक्रिया के पर्यवेक्षण के लिए जिम्मेदार थे। बैंक के साथ मिलकर गणना के जो नियम तय किए गए थे, उनमें ट्रस्ट की ओर से प्रतिनिधि के तौर पर वे ही शामिल हुए थे। इस प्रकार, प्रक्रिया को सुचारू रूप से संपन्न कराने की जिम्मेदारी उन्हीं की थी।
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चंपत राय और अनिल मिश्रा
– फोटो : PTI
इसलिए प्रक्रिया को पुख्ता तौर से पूरी कराने की जिम्मेदारी उनकी ही थी। वहीं, गणनाकर्मियों के ड्रेस, बायोमीट्रिक, तलाशी आदि को लेकर बनाए गए नियमों को अनिल मिश्रा ने ही शिथिल कर दिए थे। इसलिए इन पर कानूनी कार्रवाई की तैयारी चल रही है।
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चंपय राय और अनिल मिश्रा।
– फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
कदम-कदम पर मानकों की उड़ाईं धज्जियां
उधर, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने आरोप लगाया कि बैंक की सलाह पर मेज और कुर्सी पर बैठकर दान की गणना की जाने लगी, जो चोरी में सहायक साबित हुई। घटना सामने आने के बाद तुरंत मेज हटाकर फिर से जमीन पर बैठकर गणना शुरू कराई गई।
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चंपत राय और अनिल मिश्रा
– फोटो : @ChampatRaiVHP
बैंक के चेस्ट रूम में प्रवेश और निकास के दौरान कड़ी तलाशी, बिना जेब वाले कपड़ों का उपयोग अनिवार्य होता है, लेकिन यहां इन नियमों का पालन नहीं कराया गया। इतना ही नहीं, बैंक की ओर से गणनाकर्मियों को जो कपड़े उपलब्ध कराए गए, उनमें जेबें थीं।
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चंपत राय और अनिल मिश्रा
– फोटो : @ChampatRaiVHP
गणना के लिए हाउसकीपिंग स्टाफ को लगाया
चंपत राय ने सवाल उठाया कि यदि दिशानिर्देश वास्तव में लागू थे तो उनका पालन क्यों नहीं कराया गया। उन्होंने यह भी कहा कि संभवतः बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों को इस दिशा-निर्देश पत्र की जानकारी ही नहीं थी। बैंक ने गणना के लिए जिन युवकों को लगाया था, वे हाउसकीपिंग स्टाफ के रूप में नियुक्त थे।