राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने एकेटीयू दीक्षांत समारोह में छात्र-छात्राओं से खुलकर बात की। राजधानी के सिद्धीखेड़ा बालिका गृह की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि आज कल लड़के-लड़कियां पहले भाग जाते हैं। फिर लड़कियां प्रेग्नेंट हो जाती है और ऐसे बच्चे बाद में सरकार के भरोसे हो जाते हैं। उन्हें कोई स्वीकार नहीं करता है और वे बालगृह में पहुंचा दिए जाते हैं।
सामने बैठे छात्र-छात्राओं से उन्होंने कहा कि यह आप सबका पराक्रम है। ऐसा पराक्रम न करिए। उन्होंने कहा कि मेरा बेटा भी बंगलौर पढ़ने गया था। मैंने कहा कि कोई लड़की पसंद हो तो बताना, मैं शादी कर दूंगी। हालांकि उसने ऐसा नहीं किया। आपको कोई पसंद आए तो पहले आत्मनिर्भर बनिए, फिर शादी कीजिए। मैं लव मैरिज की विरोधी नहीं हूं। लेकिन आत्मनिर्भर होने तक शादी न करिए, कुछ गलत न करिए।
निर्माण वालों की डिग्री फर्जी तो नहीं है
राज्यपाल ने आंगनबाड़ी, स्कूल-कॉलेजों व विश्वविद्यालयों में हो रहे निर्माण कार्य की डिजाइन व उपयोगिता पर बड़े सवाल खड़े किये। उन्होंने कहा कि यहां होने वाले निर्माण कार्यों को देखकर निराशा होती है। लाइट जलाने का बोर्ड कमरे के बीच में लगा होता है। आंगनबाड़ी में पीने के पानी के टैब इतने ऊंचे हैं कि बच्चे पहुंच नहीं पाते हैं।
ट्यॉलेट इतने ऊंचे हैं कि बच्चे पहुंच नहीं सकते हैं। एक यूनिवर्सिटी में प्रथम तल पर एक तरफ वीसी, दूसरी तरफ रजिस्ट्रार का कमरा है और बीच में लाइब्रेरी प्रस्तावित की गई है। जबकि छात्रावास वहां से एक किलोमीटर दूर है।
उन्होंने इन कमियों की तरफ इशारा करते हुए कहा कि निर्माण वालों की डिग्री फर्जी तो नहीं है। उन्होंने विवि प्रशासन को कड़े निर्देश दिए कि निर्माण में गुणवत्ता के साथ उपयोगिता का भी ध्यान रखें। निर्देश दिया कि हॉस्टल में मॉर्डन किचन बनाएं, आरओ प्लांट लगवाएं।

