Cyber Fraud News: आज के डिजिटल दौर में हर रोज यूपीआई और अन्य डिजिटल माध्यमों से लेन-देन काफी तेजी से बढ़ रहा है. इसी के साथ ऑनलाइन ठगी के मामले भी सामने आ रहे हैं. कई बार साइबर ठग बहुत से लुभावने ऑफर्स और कैशबैक के लिए स्क्रैच कार्ड को स्क्रैच करने के लिए कहते हैं, अगर आप भी इस तरह के सक्रैच कार्ड्स को वेरिफाई किए बिना स्क्रैच कर लेते हैं तो सावधान हो जाइए. ऐसा ही एक मामला केरल से सामने आया, जहां एक खाताधारक के खाते से बिना OTP शेयर किए 9,854 रुपये कट गए. आइए जानते हैं…
क्या है पूरा मामला?
केरल के थिरुवनंथपुरम से ऐसा ही एक मामला सामने आया था, जहां फेडरल बैंक के एक खाताधारक को सोशल मीडिया के ज़रिए 13 जुलाई 2021 को एक स्क्रैच कार्ड मिला. खाताधारक ने कैशबैक के लालच में स्क्रैच कार्ड को फोन पे एप के ज़रिए दो बार स्कैन किया. इस दौरान उनके खाते से एक बार 4,885 और दूसरी बार 4,969 रूपये कट गए थे.
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इसके दो दिन बाद उन्होंने काट्टाकाड़ा पुलिस थाने में फ्रॉड की शिकायत दर्ज करवाई थी. खाताधारक ने किसी को कोई ओटीपी नहीं दिया था और न ही किसी को अकाउंट डीटेल्स दी थी.
बैंक ने पहले लौटाए पैसे, फिर दोबारा काटे
पहले बैंक ने खाताधारक के खाते से काटी गई पूरी राशि वापिस कर दी थी, लेकिन बाद में वे रूपये दोबारा काट लिए गए. फ़िर उन्होंने बैंकिंग लोकपाल का रूख किया. लेकिन बैंक ने उन्हें ही ज़िम्मेदार ठहराया और शिकायत को बंद कर दिया. इसके बाद नायर ने उपभोक्ता आयोग में शिकायत की.
बैंक ने क्या दी सफाई?
मामले की सुनवाई के दौरान बैंक ने कहा कि फैसबुक और फोन पे को भी ज़िम्मेदार ठहराना चाहिए. बैंक ने खाते से पैसे काटने की बात को माना लेकिन स्क्रैच कार्ड से संबंधित भूमिका पर हामी नहीं भरी. बैंक ने यह भी तर्क दिया कि आरबीआई के दिशानिर्देशों के अनुसार, शुरू में इस राशि को ‘शैडो क्रेडिट’ के रूप में जमा किया गया था. लेकिन बाद में इसकी जांच में पाया गया कि ग्राहक को ज्ञात क्रेडेंशियल्स का उपयोग करके लेनदेन किया गया था, जिसके बाद इसे वापस कर दिया गया. मामले की सुनवाई करने वाली तीन सदस्यीय पीठ ने बैंक के तर्क को खारिज कर दिया.
आयोग ने बैंक की दलील क्यों खारिज की?
आयोग की तीन सदस्यता पीठ ने कहा कि शिकायतकर्ता ने लेन-देन होने के तुरंत बाद बैंक से भी संपर्क किया और पुलिस शिकायत भी दर्ज करवाई. पीठ ने ये भी कहा कि खाताधारक ने अनजाने में ओटीपी साझा किया होगा, इसलिए बैंक को खाताधारक की लापरवाही साबित करनी होगी. क्योंकि इस पूरे मामले में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जिससे ये साबित किया जा सके कि शिकायतकर्ता ने इरादतन ऐसा किया है. इसलिए बैंक को पैसे लौटाने होंगे.
बैंक को 9,854 रुपये के साथ देना होगा जुर्माना
आयोग ने अंतिम फैसला सुनाते हुए फेडरल बैंक को 30 दिन के भीतर 9854 रूपये रीफंड करने, 5000 रुपये का जुर्माना और कानूनी खर्चे के लिए 3000 रुपये देने के निर्देश दिए हैं. तय समयसीमा में निर्देश का पालन न करने पर रीफंड और जुर्माने पर 9 प्रतिशत तक का सालाना ब्याज भरना होगा.
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