पश्चिम बंगाल में मस्जिदों के लाउडस्पीकर को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। आईएसएफ (इंडियन सेक्युलर फ्रंट) के विधायक नौशाद सिद्दीकी ने आरोप लगाया है कि पुलिस बिना किसी लिखित आदेश या आधिकारिक अधिसूचना के मस्जिद कमेटियों पर माइक्रोफोन और लाउडस्पीकर हटाने का दबाव बना रही है। उन्होंने कहा कि यदि किसी मस्जिद में ध्वनि प्रदूषण के नियमों का उल्लंघन हो रहा है, तो प्रशासन को मौजूदा कानून के तहत कार्रवाई करनी चाहिए, न कि मौखिक निर्देशों के आधार पर। इस पूरे मामले को लेकर उन्होंने अदालत जाने और पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को ईमेल भेजने की बात भी कही।
‘हमने कह दिया है, इसलिए यह करना ही होगा’
आईएसएफ (इंडियन सेक्युलर फ्रंट) के विधायक नौशाद सिद्दीकी ने बुधवार को मीडिया से बात करते हुए कहा, ‘मुझे स्थानीय लोगों के कई फोन आ रहे हैं। उनका कहना है कि पुलिस ने मस्जिद कमेटियों को बुलाकर माइक्रोफोन और लाउडस्पीकर हटाने के लिए कहा है। जब कमेटियों ने पुलिस से इस मांग का आधार जानने के लिए कोई लिखित आदेश या अधिसूचना (नोटिफिकेशन) मांगी, तो पुलिस ऐसा कोई दस्तावेज नहीं दिखा सकी। पुलिस ने केवल इतना कहा कि ‘हमने कह दिया है, इसलिए यह करना ही होगा।’ हालांकि, हमारा स्पष्ट रुख है कि यदि इन्हें हटाना है तो प्रशासन लिखित आदेश जारी करे या फिर पुलिस खुद आकर इन्हें हटाए। मैंने लोगों से अपील की है कि वे प्रशासन के साथ किसी भी तरह का टकराव न करें, क्योंकि बंगाल में बीजेपी इस समय दबाव में है।”
क्या डेसिबल सीमा के भीतर बज रहे हैं मस्जिदों के लाउडस्पीकर?
नौशाद सिद्दीकी ने कहा, ‘ध्वनि प्रदूषण के मुद्दे पर पहले भी कलकत्ता हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो चुकी है। पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने क्षेत्रों को औद्योगिक (इंडस्ट्रियल), आवासीय (रेजिडेंशियल), व्यावसायिक (कमर्शियल) और साइलेंस ज़ोन में विभाजित किया है। हर श्रेणी के लिए ध्वनि की अधिकतम डेसिबल सीमा तय है। मेरा कहना है कि मस्जिदों में लाउडस्पीकर इसी निर्धारित सीमा के भीतर बजाए जाते हैं।’
अगर नियम टूट रहे हैं तो मौजूदा कानून का इस्तेमाल क्यों नहीं?
उन्होंने आगे कहा, ‘यदि कोई मस्जिद तय डेसिबल सीमा का उल्लंघन करती है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई के लिए ‘पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986′ पहले से मौजूद है। ऐसे में उसी कानून के तहत कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही? बिना कानूनी प्रक्रिया अपनाए इस तरह का दबाव बनाना उचित नहीं है।’
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क्या अब अदालत का दरवाजा खटखटाएगी आईएसएफ?
नौशाद सिद्दीकी ने कहा, ‘हम इस पूरे मामले को लेकर अदालत जाएंगे। हमने पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को ईमेल भी भेजा है और इस मामले में उचित कानूनी कदम उठाए जाएंगे।’


