पश्चिम बंगाल के फलता विधानसभा में हुए दोबारा मतदान में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बड़ी जीत दर्ज की है। पार्टी उम्मीदवार देबांग्शु पांडा की जीत के बाद इलाके में भाजपा कार्यकर्ताओं ने जमकर जश्न मनाया और एक-दूसरे को बधाई दी। जीत की खबर सामने आते ही दक्षिण 24 परगना में भाजपा कार्यकर्ताओं ने उत्सव जैसा माहौल बना दिया। ढोल-नगाड़ों और नारों के बीच कार्यकर्ताओं ने उम्मीदवार को बधाई दी और इसे संगठन की बड़ी सफलता बताया।

‘यह जनता की जीत है’
जीत के बाद बीजेपी उम्मीदवार देबांग्शु पांडा ने कहा कि यह सिर्फ उनकी नहीं बल्कि फलता की जनता की जीत है। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान कुछ जगहों पर डर और चुनौतियां थीं, लेकिन अंततः जनता ने लोकतांत्रिक तरीके से अपना फैसला सुनाया।
भाजपा की जीत पर क्या बोले सीएम शुभेंदु
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने फलता विधानसभा उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवार देबांग्शु पांडेय की एक लाख से अधिक वोटों के अंतर से हुई जीत का श्रेय जनता को देते हुए तृणमूल कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि डायमंड हार्बर मॉडल अब ‘तृणमूल की हार-बार’ मॉडल बन गया है। शुभेंदु अधिकारी ने फलता की जनता का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने भाजपा उम्मीदवार को भारी मतों से विजयी बनाया है। उन्होंने कहा कि इस जीत के ऋण को विकास के माध्यम से चुकाया जाएगा और फलता को ‘स्वर्णिम फलता’ बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि यह जीत उन लोगों के लिए एक स्पष्ट संदेश है जो सिद्धांतों और विचारधारा से रहित होकर, एक माफिया कंपनी की तरह काम कर रहे थे।
तृणमूल पर भ्रष्टाचार और धमकी का आरोप
सीएम ने आरोप लगाया कि सत्ता खोने के बाद तृणमूल कांग्रेस का असली चेहरा सामने आ गया है। उन्होंने कहा कि इस पार्टी ने सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग कर, जनता के पैसे लूटे, लोगों से जबरन वसूली की और धमकी भरे माहौल में अपना वर्चस्व कायम किया। नेताओं ने राज्य को अपनी जागीर समझ लिया था। उन्होंने एक ऐसे “धोखेबाज” का भी जिक्र किया जिसने कमांडर का पद हथिया लिया और अपने अपराध सिंडिकेट को स्थापित करने के लिए लोकतंत्र का गला घोंटने से भी बाज नहीं आया। उन्होंने कहा कि पिछले चुनाव में तृणमूल ने डेढ़ लाख वोटों की बढ़त हासिल की थी, लेकिन 15 साल बाद जब लोगों को स्वतंत्र रूप से वोट डालने की आजादी मिली, तो सच्चाई सामने आ गई।
तृणमूल पर भ्रष्टाचार और धमकी का आरोप
सीएम ने आरोप लगाया कि सत्ता खोने के बाद तृणमूल कांग्रेस का असली चेहरा सामने आ गया है। उन्होंने कहा कि इस पार्टी ने सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग कर, जनता के पैसे लूटे, लोगों से जबरन वसूली की और धमकी भरे माहौल में अपना वर्चस्व कायम किया। नेताओं ने राज्य को अपनी जागीर समझ लिया था। उन्होंने एक ऐसे “धोखेबाज” का भी जिक्र किया जिसने कमांडर का पद हथिया लिया और अपने अपराध सिंडिकेट को स्थापित करने के लिए लोकतंत्र का गला घोंटने से भी बाज नहीं आया। उन्होंने कहा कि पिछले चुनाव में तृणमूल ने डेढ़ लाख वोटों की बढ़त हासिल की थी, लेकिन 15 साल बाद जब लोगों को स्वतंत्र रूप से वोट डालने की आजादी मिली, तो सच्चाई सामने आ गई।
भाजपा के देबांग्शु ने सीपीएम प्रत्याशी को एक लाख+ वोट से हराया
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल की फलता विधानसभा सीट पर हुए दोबारा मतदान के बाद आज मतों की गिनती हुई। 22वें और अंतिम राउंड की गिनती पूरी होने के बाद भाजपा प्रत्याशी देबांग्शु पांडा को विजयी घोषित किया गया। दूसरे नंबर पर सीपीआईएम प्रत्याशी शंभू नाथ कुर्मी रहे। कांग्रेस प्रत्याशी तीसरे नंबर पर रहे, जबकि भाजपा सरकार बनने से पहले सत्तारूढ़ रही तृणमूल कांग्रेस के प्रत्याशी को 7783 वोट मिले। निर्वाचन आयोग के आधिकारिक आंकड़े के मुताबिक भाजपा प्रत्याशी को 1,49,666 वोट मिले हैं। जीत का अंतर 1.09 लाख वोट से अधिक रहा है। दूसरे नंबर पर रहे सीपीएम प्रत्याशी शंभू नाथ कुर्मी को 40,645 वोट मिले। तीसरे नंबर पर रहे कांग्रेस प्रत्याशी अब्दुर रज्जाक मोल्ला को 10,084 वोट मिले। चौथे नंबर पर खिसकी पार्टी- तृणमूल कांग्रेस के प्रत्याशी जहांगीर खान को केवल 7783 वोट से संतोष करना पड़ा। बता दें कि 29 अप्रैल को मतदान के दौरान फलता सीट पर भारी तनाव व्याप्त हो गया था। कई बूथों से ऐसी शिकायतें आई थीं कि ईवीएम मशीनों पर इत्र जैसी कोई चीज और चिपचिपे टेप लगाए गए थे। इसके बाद जब चुनाव अधिकारियों ने मामले की गहन जांच की, तो पता चला कि कई पोलिंग बूथों पर वेब कैमरों के फुटेज के साथ भी छेड़छाड़ की कोशिश की गई थी। इस मामले में बूथ स्तर के अधिकारियों, पीठासीन अधिकारियों, मतदान कर्मियों और चुनाव पर्यवेक्षकों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हुए थे। इसी जांच रिपोर्ट के आधार पर चुनाव आयोग ने सभी बूथों पर दोबारा वोटिंग का फैसला किया था।

