पश्चिम बंगाल में वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद हुई कथित हिंसा के मामले में गिरफ्तार तृणमूल कांग्रेस के नेता जहांगीर खान को गुरुवार को पुलिस दक्षिण 24 परगना जिले के फलता क्षेत्र के कई स्थानों पर लेकर गई। जांच के दौरान उन्हें साधारण टीशर्ट और निक्कर में घटनास्थलों का निरीक्षण कराने और साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया में शामिल किया गया। इसका वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो गया है। इस दौरान केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवान भी पुलिस के साथ मौजूद रहे।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, डायमंड हार्बर एसीजेएम अदालत ने चुनाव बाद हिंसा से जुड़े एक मामले में जहांगीर खान को पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेजा है, जिसकी अवधि 14 जून तक है। जांच एजेंसियां उनके बयान के आधार पर विभिन्न स्थानों का सत्यापन कर रही हैं और इसी सिलसिले में उन्हें इलाके के कई हिस्सों में ले जाया गया। पुलिस ने मामले की जांच का हवाला देते हुए विस्तृत जानकारी साझा नहीं की, लेकिन सूत्रों का कहना है कि घटनास्थलों का निरीक्षण, साक्ष्य जुटाने और घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने के उद्देश्य से यह कार्रवाई की गई।
जहांगीर खान को इस रूप में इलाके में ले जाए जाने के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी सड़क किनारे जमा हो गए। सुरक्षा बलों की मौजूदगी में पुलिस ने पूरे अभियान को शांतिपूर्वक पूरा किया। हालिया विधानसभा चुनाव के दौरान जहांगीर खान को तृणमूल कांग्रेस ने फलता विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया था, लेकिन अंतिम समय में उनका नाम वापस ले लिया गया था। अब 2021 के चुनाव बाद हिंसा से जुड़े मामलों की जांच के तहत उनसे लगातार पूछताछ की जा रही है और पुलिस विभिन्न पहलुओं की पड़ताल में जुटी है।
नेपाल भागने की फिराक में था जहांगीर
पुलिस ने सोमवार को दक्षिण 24 परगना जिले के डायमंड हार्बर के फलता इलाके के इस तृणमूल नेता को पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने नेपाल बॉर्डर से गिरफ्तार किया पुलिस ने यह भी बताया था कि जहांगीर नेपाल बॉर्डर के रास्ते बंगाल से भागने की कोशिश कर रहे थे। गुप्त सूचना मिलने के बाद एसटीएफ के अधिकारी वहां पहुंचे। फाल्टा विधानसभा क्षेत्र से तृणमूल के हारे हुए उम्मीदवार को भी गिरफ्तार किया गया था।
चुनाव के दौरान चर्चा में आया था जहांगीर खान
बंगाल चुनाव में ममता बनर्जी की सीट के बाद दूसरी सबसे अधिक चर्चा में रही सीट फालता थी। इस सीट पर टीएमसी की ओर से जहांगीर खान मैदान में थे, जबकि भाजपा ने सीट पर देबांग्शु पांडा को उतारा था। मतदान के दौरान गड़बड़ियों की शिकायत के बाद इस सीट पर चुनाव आय़ोग ने फिर से मतदान कराया था। जिसमें भाजपा के उम्मीदवार यहां से विजयी हुए। लेकिन चुनाव के दौरान जहांगीर खान अपने कारनामों के चलते सुर्खियों में रहे।
फलता विधानसभा क्षेत्र में 21 मई को दोबारा चुनाव हुआ था। जहांगीर ने चुनाव से 48 घंटे पहले चुनावी मुकाबले से अपना नाम वापस ले लिया था। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा था, “मेरा सपना एक ‘सुनहरे फाल्टा’ का था। हमारे मुख्यमंत्री (सुवेंदु अधिकारी) फाल्टा के विकास के लिए एक विशेष पैकेज दे रहे है। इसी वजह से मैंने 21 मई को हुए दोबारा चुनाव के मुकाबले से खुद को अलग कर लिया था।”
हालांकि उन्होंने चुनाव से 48 घंटे पहले मुकाबले से नाम वापस ले लिया था, लेकिन ईवीएम पर तृणमूल के चुनाव चिह्न के बगल में जहांगीर का नाम मौजूद था। जब 24 मई को चुनाव के नतीजे घोषित हुए, तो पता चला कि भाजपा 1.09 लाख से अधिक वोटों से जीती। सीपीआई(एम) 40,000 से अधिक वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रही। जहांगीर 7,783 वोटों के साथ चौथे स्थान पर रहे। चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद से ही वे लगभग गायब थे। वे न तो घर पर और न ही पार्टी कार्यालय में दिखाई दिए।
पुष्पा बनाम सिंघम विवाद
जहांगीर के ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘पुष्पा: द राइज़’ के ‘झुकेगा नहीं’ मशहूर डॉयलॉग को लेकर राज्य की राजनीति गरमा गई थी। उपचुनाव से पहले केंद्रीय बलों और पुलिस ने जहांगीर के घर पर छापा मारा था। इस कार्रवाई का नेतृत्व उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त और पश्चिम बंगाल में पुलिस पर्यवेक्षकों में से एक अजय पाल शर्मा ने किया था। इस घटना के बाद तृणमूल ने पुलिस पर्यवेक्षक के अधिकार पर सवाल उठाए थे। जहांगीर ने कहा था कि यदि वह पुलिस अधिकारी ‘शेर’ है, तो वह भी ‘पुष्पा’ है। वे चुनाव आयोग के कथित पक्षपाती व्यवहार के आगे नहीं झुकेंगे।

