महाराष्ट्र के पुणे शहर में मंगलवार से 14 दिनों के लिए निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है। इसके तहत सार्वजनिक रूप से लोगों के जुटने और पुतले जलाने पर रोक रहेगी। यह फैसला आगामी त्योहारों और कांग्रेस के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम से पहले लिया गया है।
पुलिस ने महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम के तहत प्रतिबंध लगाने के पीछे आगामी त्योहारों और प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को कारण बताया है। वहीं, कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि यह आदेश लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के 22 अगस्त को होने वाले कार्यक्रम को रोकने के लिए जारी किया गया है।
31 अगस्त तक लागू रहेगी निषेधाज्ञा
पुलिस उपायुक्त, विशेष शाखा, डॉ. प्रशांत अमृतकर ने आदेश में ईद-ए-मिलाद, नारली पूर्णिमा और रक्षाबंधन से पहले कानून-व्यवस्था को लेकर चिंता का हवाला दिया है। इसके अलावा राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की ओर से संभावित विरोध, प्रदर्शन और बंद को भी इसका कारण बताया गया है। महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम, 1951 की धारा 37(1)(2)(3) के तहत जारी यह निषेधाज्ञा 31 अगस्त तक लागू रहेगी।
पुणे में रहेगी किन चीजों पर रोक?
आदेश के अनुसार विस्फोटक, हथियार, पत्थर या लाठी ले जाने पर रोक है। तेज नारेबाजी, नेताओं के पुतले या तस्वीरें प्रदर्शित करने और उन्हें जलाने पर भी प्रतिबंध रहेगा। पुलिस आयुक्त की पूर्व अनुमति के बिना पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने, बैठक करने या जुलूस निकालने पर भी रोक लगाई गई है।
आदेश में आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित करने पर भी रोक लगाई गई है। इसके अलावा “डर फैलाने या धमकी देने के लिए अपराधियों की रील बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट करने” पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि निषेधाज्ञा ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को रोकने की कोशिश है।
कांग्रेस ने सरकार पर लगाए क्या आरोप?
खेड़ा ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “राहुल गांधी के हर कदम को लेकर भाजपा का एक के बाद एक परेशान होना लगभग हास्यास्पद है। अब उन्होंने पुणे में आगामी छात्र की गूंज कार्यक्रम को रोकने के लिए अचानक कर्फ्यू जैसा आदेश लगा दिया है। यह ऐसी चौथी कोशिश है।” कोटा, देहरादून और प्रयागराज में इसी तरह के मामलों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “एक बार राहुल गांधी किसी चीज पर नजरें जमा लें, तो उन्हें रोकना लगभग असंभव है। पुणे में मिलते हैं, दोस्तों!”
आदेश में ड्यूटी पर तैनात सरकारी अधिकारियों को छूट दी गई है। इसके अलावा सुरक्षा गार्डों को 3.5 फीट तक की लाठी रखने की अनुमति होगी। आदेश में कहा गया है कि इसका उल्लंघन करने वालों के खिलाफ महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम, 1951 की धारा 135 के तहत कार्रवाई की जाएगी।

