
- बाद में टेक्सटाइल बिजनेस में कदम रखा, खड़ा किया विशाल साम्राज्य।
Dhirubhai Ambani: आज के टाइम में ऐसा कोई शक्स नहीं होगा जो बड़ा बनने के सपने न देखता हो, लेकिन बहुत ही कम लोग इस बात को समझ पाते हैं कि बड़ी सफलता के पीछे हमेशा कड़ी मेहनत भरी शुरुआत होती है. मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी के पिता धीरूभाई अंबानी की जिंदगी भी कुछ ऐसी ही थी, गरीबी में शुरूआत करने वाले धीरूभाई ने आगे चलकर रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी मल्टी-बिलियन डॉलर कंपनी खड़ी की, जिसे आज उनके बेटे मुकेश अंबानी नई ऊंचाइयों तक ले जा रहे हैं.
कौन सी क्लास तक पढ़ें थे धीरूभाई अंबानी?
धीरूभाई अंबानी का जन्म गुजरात के चोरवाड़ गांव में एक साधारण परिवार में हुआ था. उनके पिता एक टीचर थे, लेकिन आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उन्हें कम उम्र में ही अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ी थी. दसवीं क्लास तक पढ़ाई करने के बाद उन्होंने अपने परिवार की मदद के लिए छोटे-मोटे काम करने शुरू कर दिए.
इस काम से की करियर की शुरुआत
धीरूभाई ने अपने करियर की शुरुआत एक पेट्रोल स्टेशन अटेंडेंट के रूप में की थी. वे ब्रिटिश उपनिवेश अदन गए, जहां उन्होंने काम करते हुए अपने करियर की पहली कमाई की. केवल 17 साल की उम्र में वे बड़े सपनों के साथ अदन पहुंचे. वहां उन्होंने A. Besse & Company में काम किया और बिजनेस की बारीकियां सीखीं. इसके बाद में पेट्रोल स्टेशन पर काम करते हुए उन्हें पहली सैलरी के रूप में लगभग 300 रुपए मिले थे.
भारत लौटकर बिज़नेस की शुरुआत की
1958 में जब वे भारत लौटे तो उन्होंने अपनी पहली कंपनी Reliance Commercial Corporation शुरू की, जो मसालों का बिजनेस करती थी. उसके बाद 1962 में उन्होंने धागे के बिजनेस में कदम रखा और तीन साल बाद कंपनी का नाम बदलकर Reliance Textiles Industries Limited कर दिया. सिर्फ दसवीं तक पढ़ने के बावजूद भी धीरूभाई ने अपने दम पर एक विशाल बिजनेस साम्राज्य खड़ा किया, जो आज दुनिया भर में जाना जाता है. बिजनेस सीखने और नए आइडिया पाने के लिए धीरूभाई अक्सर बड़े बिजनेसमैन के साथ टाइम बिताते थे. वे महंगे रेस्तरां में जाकर चाय पीते थे, ताकि लोगों से नेटवर्क बना सकें.

