Why Eat Madua Roti and Fish Before Jitiya Vrat: जितिया व्रत को संतान की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना से जुड़ा माना जाता है. इस व्रत में कई महिलाएं निर्जला उपवास रखती हैं, यानी पूरे दिन न खाना और पानी न पीना. ऐसे में व्रत शुरू होने से पहले खाए जाने वाले भोजन का भी खास महत्व होता है.
बिहार, झारखंड और आसपास के कुछ इलाकों में जितिया से पहले मडुआ की रोटी और मछली खाने की परंपरा देखने को मिलती है. इसे स्थानीय खान-पान और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं से जोड़कर देखा जाता है.
मछली और मडुआ से जुड़ी मान्यता क्या है?
जितिया से जुड़ी लोक मान्यताओं में चील और सियार की कथा का खास महत्व माना जाता है. मिथिला और आसपास के कुछ इलाकों में व्रत से पहले मछली खाने की परंपरा भी है. स्थानीय मान्यताओं में मछली को समृद्धि, उर्वरता और संतान के सुख से जोड़ा जाता है.
इसी तरह मडुआ यानी रागी की रोटी को भी नहाय-खाय और पारण से जुड़ी परंपरा में शामिल किया जाता है. मडुआ को पौष्टिक और पेट भरने वाला अनाज (Why Eat Madua Roti and Fish Before Jitiya Vrat) माना जाता है. हालांकि, ये परंपराएं हर क्षेत्र और परिवार में एक जैसी नहीं हैं.
जितिया से पहले क्यों खाया जाता है मडुआ?
मडुआ यानी रागी से बनी रोटी ग्रामीण इलाकों के पारंपरिक भोजन का हिस्सा रही है. इसमें फाइबर और कुछ खनिज पाए जाते हैं. यही वजह है कि इसे पेट भरने वाला भोजन माना जाता है. जितिया से पहले मडुआ की रोटी खाने की परंपरा के पीछे एक व्यावहारिक वजह यह भी मानी जाती है कि व्रत से पहले ऐसा भोजन किया जाए, जिससे पेट कुछ समय तक भरा महसूस हो. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि माडुआ खाने से पूरे निर्जला व्रत के दौरान कमजोरी या भूख नहीं लगेगी. हर व्यक्ति का शरीर अलग तरह से प्रतिक्रिया करता है.

मछली खाने की क्या है वजह?
कुछ क्षेत्रों में जितिया से पहले मछली खाने (Why Eat Madua Roti and Fish Before Jitiya Vrat) की भी परंपरा है. खासकर उन परिवारों में जहां स्थानीय खान-पान में मछली नियमित रूप से शामिल रही है, वहां इसे व्रत से पहले के भोजन का हिस्सा माना जाता है.

मछली प्रोटीन का स्रोत है और इसमें कई पोषक तत्व पाए जाते हैं. हालांकि, जितिया से पहले मछली खाना धार्मिक रूप से हर जगह जरूरी नहीं है. अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में इस परंपरा में अंतर देखने को मिलता है.
यह भी पढ़ें: लाल-सफेद साड़ी से गहनों तक, आखिर क्यों खास है बंगाली महिलाओं का दुर्गा पूजा लुक?
व्रत से पहले भोजन में रखें संतुलन
निर्जला व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए व्रत से पहले सिर्फ एक खास भोजन पर निर्भर रहने के बजाय पूरे भोजन को संतुलित रखना ज्यादा जरूरी है. मडुआ की रोटी के साथ सब्जी और जरूरत के अनुसार दही जैसी चीजें ली जा सकती हैं. मछली खाने वाले लोग इसे कम तेल और मसाले में बना सकते हैं.
बहुत ज्यादा तला-भुना, मसालेदार या बेहद भारी भोजन करने से व्रत के दौरान प्यास, बेचैनी या पेट से जुड़ी परेशानी महसूस हो सकती है. इसलिए व्रत से पहले पेट भरने के चक्कर में जरूरत से ज्यादा खाना सही तरीका नहीं है.
हर जगह एक जैसी नहीं है परंपरा
जितिया से पहले मडुआ की रोटी और मछली खाने की परंपरा को पूरे भारत या हर परिवार की परंपरा नहीं माना जा सकता. अलग-अलग इलाकों में जितिया के नियम और खान-पान की परंपराएं अलग हो सकती हैं.
इसलिए अगर आपके परिवार में मडुआ की रोटी और मछली खाने की परंपरा चली आ रही है, तो इसे उसी स्थानीय परंपरा के संदर्भ में समझना बेहतर है. साथ ही, निर्जला व्रत रखने वाली महिलाओं को अपनी सेहत और शरीर की क्षमता का भी ध्यान रखना चाहिए.
यह भी पढ़ें: जीतिया व्रत से पहले खाएं ये चीजें, दिनभर बनी रहेगी एनर्जी और नहीं लगेगी प्यास
The post जितिया से पहले क्यों खाई जाती है मडुआ की रोटी और मछली? जानें इसके पीछे की मान्यता appeared first on Prabhat Khabar.

