टोंक जिले की दूनी नगर पालिका में चेयरमैन पद के चुनाव से पहले सियासी घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया है। भाजपा के टिकट पर पार्षद का चुनाव जीतने वाली अर्चना बड़गुजर ने चेयरमैन पद के लिए कांग्रेस का समर्थन लिया और कांग्रेस के सिंबल पर नामांकन दाखिल किया। इसके बाद उनके परिजनों ने भाजपा पर पुलिस प्रशासन के इस्तेमाल के गंभीर आरोप लगाए हैं।
कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता और महासचिव स्वर्णिम चतुर्वेदी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में अर्चना बड़गुज़र के परिजनों को मीडिया के सामने पेश कर पूरे मामले को उठाया। चतुर्वेदी के अनुसार, अर्चना ने भाजपा के सिंबल पर पार्षद का चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी। इसके बाद दूनी नगर पालिका में चेयरमैन बनाने को लेकर भाजपा के भीतर अर्चना के नाम पर सहमति नहीं बन पाई।
कांग्रेस का कहना है कि इसके बाद अर्चना ने कांग्रेस का समर्थन लिया और चेयरमैन पद के लिए कांग्रेस के सिंबल पर नामांकन दाखिल कर दिया। नामांकन के बाद घटनाक्रम ने अचानक नया मोड़ ले लिया। अर्चना के परिजनों का आरोप है कि पुलिस प्रशासन ने उनका इस्तेमाल करते हुए अर्चना को जबरन अपने साथ ले लिया।
परिजनों के मुताबिक, उन्हें अब तक यह जानकारी नहीं है कि अर्चना बड़गुज़र कहां हैं, किसके साथ हैं और किस स्थिति में हैं। उनके सास-ससुर और भाई ने पुलिस थाने जाकर भी अर्चना के बारे में जानकारी लेने का प्रयास किया, लेकिन आरोप है कि उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया।
स्वर्णिम चतुर्वेदी ने सरकार और प्रशासन पर निकाय अध्यक्ष चुनाव में दबाव बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा के पार्षदों को पुलिस एस्कॉर्ट दिया जा रहा है, जबकि कांग्रेस के पार्षदों के ठहरने के स्थानों पर रेड की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस से जुड़े पार्षदों और प्रत्याशियों को डराने, दबाने और दबाव में लेने की कोशिश की जा रही है।
चतुर्वेदी ने कहा कि राजस्थान में प्रशासन के दुरुपयोग का ऐसा उदाहरण पहले देखने को नहीं मिला। कांग्रेस ने अर्चना बड़गुज़र की तत्काल स्थिति स्पष्ट करने और उनके परिजनों को जानकारी देने की मांग की है। फिलहाल, इस मामले में कांग्रेस और अर्चना बड़गुज़र के परिजनों की ओर से लगाए गए आरोप ही सामने आए हैं। प्रशासन या भाजपा की ओर से इन आरोपों पर प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।


