जनगणना में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) कॉलम जोड़ने की मांग को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर संघर्ष की शुरुआत कश्मीर के आखिरी गांव खाजिमियार (बारामुला) से शुरू होगी। ओबीसी पदाधिकारी अक्तूबर के मध्य में इस प्रदर्शन का आगाज करेंगे। देशभर से ओबीसी समुदाय के करीब पांच हजार लोग बारामुला में जुटेंगे। इसके बाद वे अन्य राज्यों से होते हुए कन्याकुमारी पहुंचेंगे।
आंदोलन को लेकर जम्मू और कश्मीर दोनों संभाग में ओबीसी समुदाय के लोगों का समर्थन जुटाया जा रहा है। समुदाय ने दावा किया है कि आगामी 20 से 25 दिन में गृह मंत्रालय ओबीसी कॉलम जोड़ने को राजी हो जाता है तो इस प्रदर्शन को टाल कर केंद्र सरकार के लिए धन्यवाद प्रस्ताव पारित किया जाएगा।
दरअसल, देश में जनगणना चल रही है। जनगणना में अनुसूचित जाति (एससी) और जनजाति (एसटी) के लिए अलग-अलग कॉलम बनाए गए हैं जबकि ओबीसी का कॉलम नहीं है। ओबीसी कॉलम को जुड़वाने के लिए देशभर में ओबीसी समुदाय ने अभियान चलाने का फैसला किया है। इसकी शुरुआत बारामुला से होगी।
ओबीसी समुदाय ने राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की अध्यक्ष साध्वी निरंजन ज्योति से मुलाकात की है। उनके माध्यम से गृह मंत्रालय को ओबीसी कॉलम जुड़वाने के लिए पत्र भेजा है। जम्मू-कश्मीर के ओबीसी समुदाय के पदाधिकारियों के अनुसार गृहमंत्रालय से पत्र के जवाब का इंतजार किया जा रहा है। जवाब मिलने पर आगे की रणनीति बनाई जाएगी। आंदोलन में जम्म-कश्मीर से करीब तीन हजार से ज्यादा लोगों के शामिल होने की संभावना है।
शांतिपूर्वक होगा आंदोलन
ओबीसी का आंदोलन अक्तूबर के मध्य से बारामुला से शुरू होकर कन्याकुमारी तक चलेगा। गृह मंत्रालय के जवाब का इंतजार किया जा रहा है। आंदोलन की शुरुआत के मौके पर देशभर से समुदाय के लोग पहुंचेंगे। यह आंदोलन शांतिपूर्वक होगा और केंद्र सरकार से ओबीसी कॉलम को जनगणना में शामिल करने की इकलौती मांग इसमें उठाई जाएगी। आंदोलन के दौरान केंद्र सरकार फैसला कर लेती है तो इसका स्वागत होगा। फैसला नहीं होने पर दूसरे चरण में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करेंगे और मांग पूरी होने तक प्रदर्शन जारी रहेगा।
-गुलाम हसन शेरगुरी, अध्यक्ष ओबीसी वेलफेयर फोरम, जम्मू-कश्मीर


