- नेतन्याहू आगामी चुनाव जीतने के लिए युद्ध को भुना रहे हैं।
पश्चिम एशिया में इजरायल युद्ध खत्म करने के लिए तेहरान के साथ जारी बातचीत के बीच लगातार अमेरिका के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ कार्रवाइयों को अंजाम दे रहा है. वहीं, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू दूसरे मोर्चे पर लेबनान में आतंकी संगठन हिजबुल्लाह के खिलाफ भी सैन्य कार्रवाइयों को लगातार बढ़ा रहे हैं. हालांकि, इजरायल और लेबनान के बीच अमेरिका की मध्यस्थता में हाल ही में एक नाजुक सीजफायर किया गया है, लेकिन इसके बावजूद इजरायली सेना की ओर से हमले किए जा रहे हैं.
ऐसे में अब ये सवाल उठने लगा है कि इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के इन हमलों के पीछे मकसद क्या है? वहीं, यह भी दावा किया जा रहा है कि नेतन्याहू इस साल अक्टूबर, 2026 में होने वाले संसदीय चुनाव को जीतने के लिए लगातार जंग लड़ रहे हैं.
क्या युद्ध से नेतन्याहू को हो रहा राजनीतिक फायदा?
यह भी कहा जा रहा है कि इजरायली प्रधानमंत्री अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की युद्ध न करने की सलाह को नजरअंदाज कर अपने दक्षिणपंथी समर्थकों को खुश करना चाहते हैं. क्योंकि युद्ध को फिर से शुरू करना बेंजामिन नेतन्याहू के लिए अल्पकालिक राजनीतिक फायदा है, लेकिन इसे लेकर कई भयानक चुनौतियां इंतजार कर रही हैं.
बेंजामिन नेतन्याहू के लिए ईरान के साथ लड़ाई फिर शुरू करना छोटे समय के लिए राजनीतिक लाभ दे रहा है. इससे उनकी सरकार और दक्षिणपंथी समर्थक खुश है, क्योंकि उन्होंने ट्रंप की सलाह को नजरअंदाज करते हुए हमले जारी रखे.
राष्ट्रपति ट्रंप ने नेतन्याहू को लगाई फटकार
वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार (7 जून, 2026) को इजरायल को बेरूत के बाहरी इलाके में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमला करने के लिए फटकार लगाई थी. जब ईरान ने जवाब में इजरायल पर मिसाइलें दागीं, तब ट्रंप ने इजरायल से संयम बरतने की अपील की. जबकि नेतन्याहू चुनावी ओपिनियन पोल में राष्ट्रपति ट्रंप का विरोध दिखाकर अपनी कमजोर राजनीतिक स्थिति को सुधारने के लिए की जुगत में लगे हैं. वहीं, कुछ दिन पहले डोनाल्ड ट्रंप ने लेबनान में हमला करने के लिए नेतन्याहू को गुस्से में भरी कॉल में ‘क्रेजी (Crazy)’ कहकर अपमानित किया था.
नेतन्याहू को किस बात है डर?
दरअसल, नेतन्याहू को डर है कि अगर ट्रंप प्रशासन ईरान के साथ शांति समझौता कर लेगा, तो वह इजरायल के लिए खतरनाक होगा. इससे इजरायल के हाथ हिजबुल्लाह के खिलाफ कार्रवाई करने में बंध सकते हैं. जबकि कुछ इजरायली विश्लेषकों का कहना है कि ईरान पर छोटे हमले से ट्रंप-ईरान वार्ता में इजरायल को बेहतर शर्तें मिल सकती हैं.
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