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चीन-रूस नेवी की ताकत देख सिहर उठेगी दुनिया, संयुक्त अभ्यास का आगाज, आसमान से समंदर तक दिखाएंगे ताकत

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चीन और रूस ने सोमवार (6 जुलाई 2026) को अपना संयुक्त नौसैनिक सैन्य अभ्यास जॉइंट सी-2026 शुरू कर दिया. यह अभ्यास पूर्वी चीन के शेडोंग प्रांत के किंगदाओ स्थित एक सैन्य बंदरगाह पर शुरू हुआ. चीन के सरकारी प्रसारक CCTV ने इसकी जानकारी दी. रिपोर्ट के अनुसार, यह संयुक्त नौसैनिक अभ्यास तीन चरणों में आयोजित किया जाएगा. पहले चरण में दोनों देशों की नौसेनाओं की टास्क फोर्स एकत्र होगी. दूसरे चरण में बंदरगाह पर संयुक्त योजना और रणनीति तैयार की जाएगी. इसके बाद तीसरे चरण में समुद्र में अलग-अलग सैन्य अभियान चलाए जाएंगे.

CCTV के मुताबिक, इस अभ्यास में शामिल चीन और रूस के युद्धपोत किंगदाओ के आसपास समुद्री क्षेत्र में संयुक्त टोही, एयर डिफेंस मिसाइल डिफेंस जैसे अभियानों का अभ्यास करेंगे. इसके अलावा सैनिकों को हथियारों के वास्तविक इस्तेमाल की ट्रेनिंग भी दी जाएगी.

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चीन और रूस के सैन्य अभ्यास का मकसद क्या है?

इस संयुक्त सैन्य अभ्यास का मकसद दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाना, समुद्री अभियानों में समन्वय मजबूत करना और संयुक्त ऑपरेशन की क्षमता को बेहतर बनाना बताया गया है. यह अभ्यास ऐसे समय में हो रहा है जब क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों के बीच चीन और रूस लगातार अपने रक्षा सहयोग को मजबूत कर रहे हैं.

रूस और चीन का रक्षा तकनीक के क्षेत्र में भी सहयोग

रूस और चीन रक्षा तकनीक के क्षेत्र में भी सहयोग करते हैं. रूस लंबे समय से चीन को आधुनिक लड़ाकू विमान, एयर डिफेंस सिस्टम, हेलीकॉप्टर इंजन और अन्य डिफेंस मशीन उपलब्ध कराता रहा है. चीन ने रूस से Sukhoi Su-35 लड़ाकू विमान और S-400 Triumf एयर डिफेंस सिस्टम जैसी एडवांस सैन्य तकनीक खरीदी है. दोनों देश संयुक्त रूप से समुद्री गश्त और रणनीतिक हवाई गश्त भी करते हैं. कई बार उनके युद्धपोत और बॉम्बर विमान जापान सागर, पूर्वी चीन सागर और प्रशांत महासागर में संयुक्त मिशन पर देखे गए हैं. इन अभियानों का मकसद दोनों देशों की सैन्य क्षमता और आपसी समन्वय को प्रदर्शित करना होता है.

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