Crude Oil Price Soars: अमेरिका और ईरान के बीच नए हमले के बाद सोमार को कच्चे तेल की कीमतें एक बार फिर से बढ़ गई हैं. दोनों देशों में टकराव से होर्मुज (Strait of Hormuz) के फिर से बंद होने का खतरा मंडरा रहा है. चूंकि यह एनर्जी शिपमेंट के लिए एक अहम समुद्री मार्ग है और इसी के जरिए दुनिया का लगभग पांचवां हिस्सा आता-जाता है.
ऐसे में इसके बंद होने से क्रूड ऑयल की सप्लाई पर गहरा असर पड़ेगा. इसी आशंका से आज ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 3.5% उछलकर 78.67 डॉलर प्रति बैरल हो गया और अब यह 79 डॉलर की ओर बढ़ रहा है, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड फ्यूचर्स 3.4% बढ़कर 73.87 डॉलर प्रति बैरल हो गया है.
ईरान ने होर्मुज बंद करने का किया ऐलान
इस बीच, ईरान ने होर्मुज को अगले आदेश तक बंद कर दिए जाने का बड़ा ऐलान कर दिया. हालांकि, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा है कि उनकी सेनाएं नेविगेशन की आजादी सुनिश्चित करने के लिए तैयार हैं.
सेंट्रल कमांड ने एक्स पर लिखा, “होर्मुज जलडमरूमध्य उन सभी जहाजों के लिए खुला है जो अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग से कानूनी रूप से गुजरना चाहते हैं.” अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने यह भी कहा कि उसने रविवार को शाम 5 बजे (ईस्टर्न टाइम) हमलों का एक नया दौर शुरू किया है ताकि स्ट्रेट में कमर्शियल जहाजों पर हुए हमलों के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया जा सके.
The Strait of Hormuz is open to all vessels seeking to lawfully transit the international waterway. U.S. forces are positioned and prepared to ensure that freedom of navigation remains available despite unwarranted Iranian aggression, harassment, threats, and arbitrary… pic.twitter.com/FS3TUBOZEj
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शांति समझौते का नहीं हुआ असर
अमेरिका और ईरान के बीच पिछले महीने 17 जून को फ्रांस में G7 समिट के दौरान एक ऐतिहासिक संघर्षविराम समझौते पर हस्ताक्षर हुआ था. इसके तहत, दोनों देश युद्ध को स्थायी रूप से रोकने, होर्मुज से जहाजों की मुफ्त और सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने पर सहमत हुए थे. इस समझौते का मकसद मिडिल ईस्ट में शांति बहाली के लिए 60 दिनों का एक टाइमलाइन तैयार करना था, जो अब कहीं न कहीं नाकाम साबित होती दिख रही है.
भारत के लिए कितना खतरा?
फ्रांस समझौते के तहत ईरान को तेल बेचने की छूट मिली थी, जिससे ग्लोबल मार्केट में कच्चा तेल 71 डॉलर के स्तर पर आ गया था. अब समझौता टूटने से ब्रेंच क्रूड अचानक से 3.7% उछलकर 79 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है.
अगर यही हाल रहा, तो भारत में सरकारी तेल कंपनियों को मजबूरन पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में 3 रुपये से 5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है. इसके अलावा, चूंकि भारत अपनी जरूरत का 90% से ज्यादा रसोई गैस खाड़ी देशों से मंगाता है. ऐसे में अगर होर्मुज से तेल और गैस की सप्लाई फिर से रूकी, तो सरकार को आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए दोबारा सिलेंडर बुकिंग पर न्यूनतम 25 दिन का लॉक-इन पीरियड लागू करना पड़ सकता है.
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