केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ में बड़ी टूट का दावा करते हुए उद्धव ठाकरे पर तीखा हमला किया है। संजय राउत के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए आठवले ने कहा कि उद्धव ठाकरे के लिए अपने सांसदों और विधायकों को संभालना अब बहुत मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि उद्धव ठाकरे ने साल 2019 में देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री बनाने के लिए समर्थन न देकर बड़ी गलती की थी। वे उस समय सही फैसला लेते, तो खुद उपमुख्यमंत्री बन सकते थे।
आठवले ने कहा, शिवसेना (UBT) के नौ में से छह सांसद अब एकनाथ शिंदे के साथ आ गए हैं। इससे महाराष्ट्र में एनडीए और महायुति की ताकत काफी बढ़ गई है। केवल महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि देश के अन्य राज्यों में भी विपक्षी खेमे में हलचल तेज है। आठवले के अनुसार, डीएमके ने कांग्रेस के साथ अपना गठबंधन तोड़ दिया है। ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के कई सांसद एनडीए में शामिल हो चुके हैं और अब आम आदमी पार्टी के लोकसभा सांसदों के भी साथ आने की पूरी संभावना है।
केंद्रीय मंत्री ने विश्वास जताया कि मोदी सरकार महिला आरक्षण से जुड़ा परिसीमन बिल (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) जल्द ही पास करने जा रही है। उन्होंने कहा कि इस बार सदन में सरकार के पास दो-तिहाई बहुमत हो सकता है, जिससे बड़े फैसले लेना आसान होगा।
इस बीच, शिवसेना (UBT) के बागी सांसदों ने दिल्ली में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर अपना पक्ष रखा। ये सांसद अलग गुट के तौर पर मान्यता चाहते हैं और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय की योजना बना रहे हैं। दूसरी तरफ, उत्तर प्रदेश में भी समाजवादी पार्टी में टूट की अटकलें तेज हैं। राज्य के मंत्रियों ने दावा किया है कि सपा के कई सांसद भाजपा में शामिल होने के लिए तैयार हैं।
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हालांकि, उद्धव गुट के नेताओं ने लोकसभा अध्यक्ष से आग्रह किया है कि इस मामले में कोई भी फैसला कानून, संविधान और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आधार पर ही लिया जाए। फिलहाल लोकसभा में आम आदमी पार्टी के तीन सांसद हैं, जिनके पाला बदलने की चर्चाओं ने देश का सियासी पारा बढ़ा दिया है।
बता दें कि इससे पहले, आम आदमी पार्टी (आप) के सात राज्यसभा सांसदों ने पार्टी का दामन छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थामा था। राज्यसभा के तत्कालीन सभापति सीपी राधाकृष्णन ने आम आदमी पार्टी के इन सभी सदस्यों के भाजपा में विलय को मंजूरी दी थी। आम आदमी पार्टी से पाला बदलने वाले इन प्रमुख नेताओं में राघव चड्ढा, संदीप पाठक, अशोक कुमार मित्तल, हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, राजिंदर गुप्ता और विक्रमजीत सिंह साहनी शामिल थे।
