
अगर आप अपने पैसे को निवेश करना चाहते हैं और बाजार के उतार-चढ़ाव से बचना चाहते हैं, तो सरकारी छोटी बचत योजनाएं आपके लिए एक विकल्प हो सकती हैं। इन योजनाओं को केंद्र सरकार के नियमों के तहत चलाया जाता है।
इनमें निवेश की अवधि, ब्याज दर, जमा की सीमा और निकासी के नियम अलग-अलग होते हैं। पर सरकारी योजनाएं होने की वजह से इसमें रिस्क न के बराबर होता है यानी इन्हें सुरक्षित निवेश कहा जाता है। तो चलिए जानते हैं ऐसी ही 4 सरकारी योजनाओं के बारे में जिनमें आप निवेश कर सकते हैं। आप आगे इन योजनाओं के बारे में जान सकते हैं…

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कौन सी सरकारी योजनाओं में निवेश कर सकते हैं?
– फोटो : Adobe Stock
कौन सी सरकारी योजनाओं में कर सकते हैं निवेश?
पब्लिक प्रोविडेंट फंड यानी PPF
- PPF लंबी अवधि के निवेश के लिए इस्तेमाल की जाने वाली सरकारी बचत योजना है
- इसकी अवधि 15 साल होती है
- इसमें हर वित्त वर्ष न्यूनतम 500 रुपये और अधिकतम 1.5 लाख रुपये जमा किए जा सकते हैं
- वर्तमान में PPF पर ब्याज दर 7.1 प्रतिशत सालाना है
- PPF में मिलने वाला ब्याज सरकार की ओर से तय किया जाता है और इसकी दर समय-समय पर बदली जा सकती है

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कौन सी सरकारी योजनाओं में निवेश कर सकते हैं?
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राष्ट्रीय सेविंग्स सर्टिफिकेट यानी NSC
- NSC को पोस्ट ऑफिस के जरिए खरीदा जा सकता है
- इसकी अवधि 5 साल है
- वर्तमान में NSC पर 7.7 प्रतिशत सालाना ब्याज दिया जा रहा है
- इस योजना में निवेश की गई रकम और ब्याज से जुड़े नियम आयकर कानून के प्रावधानों के अधीन होते हैं
- इसलिए निवेश करने से पहले मौजूदा टैक्स नियमों को भी देखना जरूरी है

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कौन सी सरकारी योजनाओं में निवेश कर सकते हैं?
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सुकन्या समृद्धि अकाउंट
- ये योजना लड़कियों के लिए शुरू की गई है
- पैरेंट्स पात्र बेटी के नाम पर सुकन्या समृद्धि खाता खोल सकते हैं
- इस योजना में वर्तमान ब्याज दर 8.2 प्रतिशत सालाना है
- खाते में एक वित्त वर्ष में न्यूनतम 250 रुपये और अधिकतम 1.5 लाख रुपये जमा किए जा सकते हैं
- योजना में बेटी की उम्र और खाते से निकासी से जुड़े विशेष नियम लागू होते हैं

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कौन सी सरकारी योजनाओं में निवेश कर सकते हैं?
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किसान विकास पात्र यानी KVP
- KVP भी पोस्ट ऑफिस की छोटी बचत योजना है
- वर्तमान में इसमें 7.5 प्रतिशत सालाना ब्याज दर लागू है
- इसमें निवेश की रकम तय अवधि के बाद दोगुनी होने के लिए निर्धारित की जाती है
- मौजूदा नियमों के अनुसार KVP की परिपक्वता अवधि ब्याज दर के आधार पर तय होती है
