Parenting Tips: आजकल की जिंदगी बहुत ही ज्यादा भागदौड़ भरी हो गई है. इस वजह से माता-पिता के पास इतना भी समय नहीं है कि वे अपने बच्चे के साथ सिर्फ कुछ मिनटों का सही से क्वालिटी टाइम बिता सकें. अक्सर देखा जाता है कि मम्मी और पापा को ऑफिस और घर के कामों से फुर्सत ही नहीं मिलती और वहीं, दूसरी तरफ बच्चे का भी ज्यादातर समय स्कूल, ट्यूशन और मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते निकल जाता है. अक्सर इस बिजी लाइफस्टाइल की वजह से रिश्ते में दूरियां बढ़ने लग जाती हैं.
अगर आपके और आपके बच्चे के बीच समय की कमी होने की वजह से दूरियां बढ़ने लग गई हैं, तो आज का यह आर्टिकल आपके काम का है. आज हम आपको बताने वाले हैं कि किस तरह से आप अपने बच्चे के साथ कमजोर हो रहे इस रिश्ते को मजबूत बनाने के लिए अपने दिन के सिर्फ 10 मिनट निकालकर ऐसा कर सकते हैं. जब आप हर दिन अपने बच्चे के साथ 10 मिनट इस तरह से समय बिताने लगेंगे तो आप दोनों के बीच का प्यार और भरोसा देखते ही देखते बढ़ जाएगा.

बातचीत की शुरुआत सही तरीके से करें
दिनभर के बाद जब भी आप रात के समय अपने बच्चे के साथ बैठें, तो अपनी बात की शुरुआत कभी भी पढ़ाई या फिर होमवर्क के सवालों के साथ करने की गलती न करें. अपने बच्चे से डायरेक्ट यह पूछने के बजाय कि ‘आज कितना पढ़ा?’ या ‘टेस्ट में कितने नंबर आए?’, बेहतर होगा कि आप उससे कुछ हल्के-फुल्के सवाल पूछकर बातचीत की शुरुआत करें. उदाहरण के लिए, ‘आज स्कूल में सबसे ज्यादा मजा किस बात में आया?’ या ‘आज कौन सी नई बात पता चली?’ जब आप ऐसे सवाल पूछते हैं, तो बच्चे पर कोई प्रेशर नहीं बनता और वह खुशी-खुशी अपनी बातें बताने लगता है.
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फोन साइड में रखें और ध्यान से उसकी बात सुनें
जब आपका बच्चा आपके साथ अपनी बातें शेयर कर रहा हो, तो उस समय अपने हाथों से फोन को साइड में रख दें और अगर टीवी चल रही है तो उसे भी बंद कर दें. बच्चा जब भी आपसे बात करे, उसकी आंखों में देखकर उसकी बातों को सुनें. बात के बीच में उसे बार-बार न तो टोकें और न ही तुरंत उसे अपनी सलाह देने की गलती करें. कुछ भी कहने से पहले उसकी बात पूरी तरह से खत्म होने दें. जब बच्चे को लगता है कि उसके मम्मी-पापा उसकी बात को ध्यान से सुन रहे हैं, तो उसका कॉन्फिडेंस बढ़ता है और वह आपसे अपनी हर बात शेयर करने लगता है.
गलती करने पर डांटने के बजाय दोस्त की तरह समझाएं
अगर बच्चा आपको दिनभर की अपनी किसी गलती या किसी डर के बारे में बताता है, तो तुरंत उस पर गुस्सा मत कीजिए. अगर आप बात-बात पर उस पर चिल्लाएंगे या उसे डांटेंगे, तो बच्चा अगली बार से आपसे सच बोलने में डरेगा और बातें छुपाने लगेगा. डांटने के बजाय उससे प्यार से कहें, ‘कोई बात नहीं, गलती से ही इंसान सीखता है. अब बताओ इसे हम मिलकर कैसे सही कर सकते हैं?’ इससे बच्चे को यह भरोसा मिलता है कि चाहे जो हो जाए, उसके पेरेंट्स हमेशा उसके साथ खड़े हैं.
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तारीफ करें और थोड़ा सा प्यार भी जताएं
जब आप अपने बच्चे से समय निकालकर बात कर रहे हों, तो इन 10 मिनटों के दौरान बच्चे के किसी अच्छे काम की तारीफ जरूर करें. चाहे उसने अपना कमरा साफ रखा हो, अपना कोई काम खुद किया हो या फिर अपने किसी दोस्त की मदद ही क्यों न की हो, आपकी छोटी से छोटी तारीफ से भी बच्चे का मन खुश हो जाता है. बातचीत खत्म करने के बाद बच्चे को प्यार से गले लगाएं या उसके सिर पर हाथ फेरें. यह छोटी सी जादू की झप्पी बच्चे को बहुत सेफ और स्पेशल महसूस कराती है.
हर दिन के लिए एक फिक्स रूटीन सेट करें
आपको इस बात का खास ख्याल रखना होगा कि बच्चे से बात करने का यह 10 मिनट का समय हर रोज फिक्स होना चाहिए. बच्चे से बात करने के लिए रात को सोने से पहले का समय सबसे अच्छा माना जाता है. इस टाइम बच्चा एकदम रिलैक्स होता है और बिना किसी झिझक के अपने मन की बात कह पाता है.
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