जटिल जन्मजात हृदय रोग से जूझ रही 15 वर्षीय तन्वी की मौत ने देश के बड़े सरकारी अस्पतालों में सर्जरी के लिए लंबी प्रतीक्षा अवधि पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दिल्ली एम्स में न्यूरोसर्जरी के लिए मरीजों को जहां पांच साल तक इंतजार करना पड़ रहा है, वहीं हार्ट सर्जरी की प्रतीक्षा अवधि करीब दो साल पहुंच गई है।

सरकारी आंकड़ों और आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार, एम्स के न्यूरोसर्जरी विभाग में 1324 मरीज सर्जरी की प्रतीक्षा सूची में हैं। हार्ट सर्जरी के लिए 690 और कैंसर सर्जरी के लिए 305 मरीज कतार में हैं। अन्य विभागों में भी स्थिति अलग-अलग है। जनरल सर्जरी के लिए करीब दो महीने और गैस्ट्रो सर्जरी के लिए तीन से छह महीने का इंतजार है। गायनेकोलॉजी में कैंसर जैसे गंभीर मामलों में तीन महीने के भीतर सर्जरी की सुविधा मिल रही है। वहीं, ऑर्थोपेडिक सर्जरी में प्रतीक्षा अवधि साढ़े तीन महीने से ढाई साल तक है।
कई विभागों में तत्काल सर्जरी की सुविधा
नेत्र विज्ञान, कान-नाक-गला, बाल चिकित्सा, बर्न एवं प्लास्टिक सर्जरी, यूरोलॉजी और डेंटल विभाग में सर्जरी के लिए लंबी प्रतीक्षा नहीं है। आपातकालीन और गंभीर मामलों को भी प्राथमिकता दी जाती है। हालांकि, नियोजित सर्जरी के लिए लंबी कतारें मरीजों के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।
39 फीसदी फैकल्टी पद खाली
संसदीय समिति की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, एम्स दिल्ली में फैकल्टी के 39 फीसदी और गैर-फैकल्टी के 22 फीसदी पद खाली हैं। डॉक्टरों और कर्मचारियों की कमी का असर ऑपरेशन थिएटर और अस्पताल की क्षमता पर भी पड़ रहा है। करीब एक-चौथाई ऑपरेशन थिएटर और 20 फीसदी बेड बंद बताए गए हैं। आईसीयू के करीब 18.7 फीसदी बेड भी इस्तेमाल नहीं हो पा रहे हैं।
रोजाना 10-12 हजार नए मरीज पहुंचते हैं
एम्स में देशभर से रोजाना 10 से 12 हजार नए मरीज पहुंचते हैं, जबकि प्रतिदिन करीब 275 सर्जरी हो पाती हैं। मरीजों की भारी संख्या और सीमित संसाधनों के कारण नियोजित सर्जरी के लिए प्रतीक्षा सूची लगातार लंबी हो रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, गंभीर मरीजों को प्राथमिकता दिए जाने के बावजूद लंबे समय तक सर्जरी टलना अस्पताल की क्षमता और उपलब्ध मानव संसाधनों पर दबाव को दर्शाता है।
