भारत में संपन्न हुए ब्रिक्स समिट 2026 के दौरान ईरान और संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE के बीच कूटनीतिक संपर्क की एक अहम तस्वीर सामने आई है. दोनों देशों ने शनिवार को BRICS के साझा बयान का समर्थन किया, जिसमें मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और तनाव के बीच सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की गई है. लंबे समय से तनावपूर्ण रहे ईरान और UAE के बीच इस तरह का संपर्क क्षेत्रीय स्तर पर कूटनीतिक प्रगति का संकेत माना जा रहा है.
BRICS के साझा बयान में मिडिल ईस्ट यानी पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते तनाव पर चिंता जताई गई. सदस्य देशों ने ऐसे कदमों से बचने की अपील की, जिनसे स्थिति और बिगड़ सकती है. बयान में आम लोगों की सुरक्षा, देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने पर भी जोर दिया गया.
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ईरान के राष्ट्रपति और UAE क्राउन प्रिंस की मुलाकात
ब्रिक्स समिट के पहले दिन ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने UAE के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात की. युद्ध शुरू होने के बाद दोनों देशों के नेताओं के बीच यह उच्च स्तर की महत्वपूर्ण बैठक मानी जा रही है. अबू धाबी मीडिया ऑफिस के मुताबिक, दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों के अलावा तनाव कम करने, स्थिरता कायम करने और क्षेत्र में शांति एवं विकास को बढ़ावा देने के प्रयासों पर चर्चा की. हालांकि, बैठक में किसी खास समझौते या समाधान पर पहुंचने की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई. ईरान के दूतावास ने भी दोनों नेताओं की मुलाकात की तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा की, लेकिन बातचीत के विस्तृत एजेंडे की जानकारी नहीं दी गई.
BRICS के साझा बयान में क्या कहा गया?
BRICS देशों के संयुक्त बयान में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को लेकर चिंता जाहिर की गई. सदस्य देशों ने सभी संबंधित पक्षों से अधिकतम संयम बरतने और ऐसे कदम नहीं उठाने की अपील की, जिससे संघर्ष और गंभीर हो सकता है. बयान में आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने की बात कही गई. इसके अलावा वैश्विक व्यापार, सप्लाई चेन, ऊर्जा की आवाजाही और समुद्री सुरक्षा को सुरक्षित रखने की जरूरत पर भी जोर दिया गया.
ईरान और UAE के बीच क्यों महत्वपूर्ण है यह मुलाकात?
ईरान और UAE के संबंधों पर मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष का असर पड़ा है. युद्ध के दौरान ईरान की ओर से UAE में मौजूद कुछ ठिकानों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं भी सामने आई हैं. ऐसे माहौल में दोनों देशों के शीर्ष नेताओं की एक ही मंच पर मुलाकात और साझा बयान का हिस्सा बनना महत्वपूर्ण माना जा रहा है. हालांकि, इस बैठक को किसी बड़े समझौते या दोनों देशों के बीच विवाद खत्म होने के संकेत के तौर पर देखना अभी जल्दबाजी होगी. फिलहाल यह दोनों देशों के बीच संवाद बनाए रखने की कोशिश जरूर दिखाती है.
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