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ईरान युद्ध में अमेरिका को बड़ा नुकसान:f-35 और Mq-9 ड्रोन समेत 42 सैन्य विमान हुए तबाह, इस रिपोर्ट में खुलासा – Us Iran War 42 Aircraft Loss Report Strait Of Hormuz

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अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव के नुकसान के चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। अमेरिकी कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस (सीआरएस) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, इस युद्ध में अमेरिका ने अपने फाइटर जेट्स और ड्रोन्स सहित कम से कम 42 सैन्य विमान गंवा दिए हैं। पेंटागन के सैन्य वित्त प्रमुख जूल्स डब्ल्यू हर्श III ने सीनेट की समिति को बताया कि इस सैन्य अभियान की अनुमानित लागत बढ़कर अब 29 अरब डॉलर यानी करीब 2,802.83 अरब रुपये तक पहुंच चुकी है। लागत में इस भारी उछाल की मुख्य वजह नष्ट हुए महंगे युद्धक विमानों की मरम्मत और उन्हें बदलने में आने वाला भारी खर्च है।

उन्नत F-35A और ड्रोन्स को भारी नुकसान

अमेरिकी संसद की शोध संस्था की ओर से जारी 13 मई की इस रिपोर्ट में बताया गया है कि खोए हुए विमानों में चार F-15E स्ट्राइक ईगल लड़ाकू विमान शामिल हैं। इनमें से तीन विमान दो मार्च को कुवैत के ऊपर ‘फ्रेंडली फायर’ यानी अपनी ही सेना की गोलाबारी का शिकार हुए, जबकि चौथा विमान पांच अप्रैल को ईरान के आसमान में मार गिराया गया। इसके अलावा, अमेरिका ने अपना सबसे अत्याधुनिक पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट F-35A लाइटनिंग II भी गंवा दिया है।

ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया पर इस रिपोर्ट को साझा करते हुए दावा किया कि ईरान की सेना दुनिया के सबसे अचूक माने जाने वाले F-35 फाइटर जेट को मार गिराने वाली पहली ताकत बन गई है। नुकसान की इस फेहरिस्त में 24 एमक्यू-9 रीपर ड्रोन, एक एमक्यू-4सी ट्रिटॉन ड्रोन, सात केसी-135 स्ट्रैटोटैंकर-ईंधन भरने वाले विमान, एक ई-3 सेंट्री टोही विमान, दो एमसी-130जे कमांडो II विशेष अभियान विमान और एक एचएच-60डब्ल्यू जोली ग्रीन II हेलीकॉप्टर भी शामिल हैं।

यह भी पढ़ें: US-Iran: ‘क्या अब हम जाकर इसे पूरा खत्म करें?’,  शांति समझौते में देरी को लेकर ईरान पर भड़के राष्ट्रपति ट्रंप

वैश्विक संकट: होर्मुज जलडमरूमध्य बंद और वार्ता विफल

इस युद्ध की शुरुआत 28 फरवरी को हुई थी, जब अमेरिका और इस्राइल ने ईरान पर हमला किया था। जवाब में ईरान ने इस्राइल और अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जोरदार मिसाइल हमले किए। ईरान ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य को ब्लॉक कर दिया, जिससे दुनिया में गंभीर ऊर्जा संकट पैदा हो गया है। दुनिया का 20 प्रतिशत पेट्रोलियम यहीं से गुजरता है। पाकिस्तान के इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच चल रही शांति वार्ता 12 अप्रैल को पूरी तरह विफल हो गई थी।

फिलहाल क्षेत्र में एक बेहद नाजुक युद्धविराम लागू है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा है कि यह युद्धविराम इस समय बेहद नाजुक स्थिति में है। वहीं ईरान ने चेतावनी दी है कि भविष्य में जंग की दोबारा शुरुआत होने पर अमेरिका को इससे भी बड़े और भयानक सरप्राइज देखने को मिलेंगे।

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