राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैन डाइक पर आतंकवाद विरोधी कानून यूएपीए नहीं लगाया। इस पर कांग्रेस ने मंगलवार को सवाल उठाए।
कांग्रेस ने क्या आरोप लगाया?
कांग्रेस ने पूछा कि क्या नरेंद्र मोदी सरकार ने अमेरिकी अधिकारियों के कहने पर एनआईए पर ऐसा करने का दबाव बनाया? पार्टी ने यह भी पूछा कि इस फैसले के बदले भारत को क्या मिलेगा? विपक्षी पार्टी ने कहा कि यह पूरा मामला ‘धौंस दिखाने’ जैसा लगता है।
एनआईए सात विदेशी नागरिकों पर क्या कार्रवाई की?
एनआईए ने मंगलवार को सात विदेशी नागरिकों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया। इनमें अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैन डाइक भी शामिल है। इन सभी पर भारत में अवैध तरीके से आने, रहने और घूमने का आरोप है। एनआईए ने इन्हें आतंकी साजिश के मामले में गिरफ्तार किया था। आरोप था कि इनके भारत में सक्रिय जातीय सशस्त्र समूहों से संबंध थे।
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आरोपपत्र में क्या कहा गया?
एनआईए ने विशेष जज प्रशांत शर्मा की अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया। इसमें सातों पर आव्रजन और विदेशी अधिनियम की धारा 21 और 23 के तहत अपराध का आरोप लगाया गया। एनआईए ने कहा कि यूएपीए के तहत अपराध के बारे में पूरी और सही जानकारी पता करने और उसकी पुष्टि करने के लिए अभी और समय चाहिए।
कांग्रेस ने एनआईए से क्या पूछा?
कांग्रेस महासचिव और संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने इस मामले पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि क्या एनआईए ने सही जांच के बाद अमेरिकी नागरिक पर आतंक के आरोप हटाए या अमेरिकी अधिकारियों के कहने पर मोदी सरकार ने एनआईए पर तुरंत ऐसा करने का दबाव बनाया? उन्होंने यह भी पूछा कि भारत को इस फैसले के बदले क्या मिलने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि यह मामला धौंस दिखाने जैसा लगता है।
अमेरिकी नागरिक को कब गिरफ्तार किया गया?
एनआईए ने वैन डाइक को कोलकाता हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया था। वहीं, यूक्रेन के नागरिक पेट्रो हुर्बा, तारास स्लिवियाक और इवान सुखमानोव्स्की को 13 मार्च को लखनऊ हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया गया था।
तीन और यूक्रेनी नागरिक कहां पकड़े गए?
तीन अन्य यूक्रेनी नागरिकों को उसी दिन दिल्ली हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया गया था। इनके नाम मारियन स्टेफानकिव, मैक्सिम होंचारुक और विक्टर कामिंस्की हैं। आरोप लगाया गया था कि यह समूह भाड़े के लड़ाकों के रूप में काम कर रहा था।
पहले किस कानून के तहत मामला दर्ज हुआ था?
एनआईए ने पहले इन लोगों के खिलाफ यूएपीए की धारा 18 के तहत मामला दर्ज किया था। यह धारा साजिश करने की सजा से जुड़ी है। इसके साथ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की कुछ धाराएं भी लगाई गई थीं।
एनआईए ने आगे की जांच पर क्या कहा?
चार्जशीट में एनआईए ने कहा कि यूएपीए के तहत किए गए अपराधों को लेकर जांच का एक बड़ा हिस्सा पूरा हो चुका है। लेकिन आगे की जांच अभी जारी है। पूरी और सही जानकारी पता करने के लिए और समय चाहिए।
ड्रोन और डिजिटल उपकरण क्यों अहम हैं?
एनआईए ने कहा कि भारत के रास्ते बड़ी संख्या में ड्रोन और उनके सामान लाए गए थे। इन्हें बरामद भी किया गया है। इसके अलावा, बड़ी संख्या में डिजिटल उपकरण जब्त किए गए हैं। इनकी जांच अभी चल रही है।
आरोपियों की बड़ी साजिश में क्या भूमिका हो सकती है?
एनआईए ने कहा कि आगे की जांच से यह पता चल सकता है कि आरोपियों की ऐसी गतिविधियों में भूमिका थी या नहीं, जो भारत की एकता, अखंडता, सुरक्षा और संप्रभुता को प्रभावित या खतरे में डाल सकती हैं। जांच से यह भी पता चल सकता है कि उनका मकसद भारत के किसी वर्ग में आतंक फैलाना था या नहीं।
एनआईए ने कहा कि बड़ी साजिश के सभी पहलुओं का पता लगाना अभी बाकी है। इसलिए गिरफ्तार आरोपियों और दूसरे लोगों के खिलाफ आगे की जांच जारी रखने की अनुमति मांगी गई। इसके लिए बीएनएसएस की धारा 193(9) के तहत आगे की जांच जारी रखने की बात कही गई।


