देश में महंगाई लगातार बढ़ रही है, जिसके कारण आम जनता की जेब पर काफी बोझ बढ़ रहा है. खासतौर से खाने- पीने की चीजों के दाम लगातार बढ़ते ही जा रहे हैं, जिसकी वजह से हर किसी के किचन का बजट बिगड़ गया है. लेकिन ये तो अभी केवल शुरुआत है, क्योंकि आने वाले समय में महंगाई और भी ज्यादा तेजी से बढ़ने वाली है. इसके पीछे सबसे बड़ी वजह मौसम की मार बताई जा रही है.
आने वाले समय में बढ़ेगी महंगाई
दरअसल इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले समय में महंगाई बढ़ने वाली है. इस साल मौसम का हाल बड़ा ही बुरा रहा है, ऐसे में इसका सीधा असर फसलों पर पड़ा है. इसी वजह से महंगाई के अभी और भी ज्यादा बढ़ने के आसार हैं.
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कृषि मंत्रालय के मुताबिक, 4 सितंबर तक खरीफ की फसलों की कुल बुआई का रकबा 1,086.3 लाख हेक्टेयर रहा, जो 2025 की इसी अवधि के 1,104 के आंकड़े से सिर्फ 1.6% कम है. लेकिन सिर्फ बुआई के रकबे को ही सही तस्वीर नहीं माना जा सकता है. इसका बेहतर पैमाना फर्टिलाइजर की बिक्री से लगाया जा सकता है.
किन चीजों पर बढ़ रहा महंगाई का दबाव?
फिलहाल महंगाई का दबाव मुख्य रूप से खाने के तेल, अनाज, गेहूं, मक्का, चीनी आदि चीजों पर बढ़ रहा है. अगस्त में UN के फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गनाइज़ेशन का फूड प्राइस इंडेक्स 133.3 पॉइंट पर था, जो नवंबर 2022 के बाद सबसे ज्यादा है. इस महंगाई के बढ़ने की वजह वेसिट एशिया और रूस-यूक्रेन में बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव की वजह से ट्रेड लॉजिस्टिक्स में रुकावट और अल नीनो के मजबूत होने से ग्लोबल कीमतें और बढ़ सकती हैं.
अगस्त में वेजिटेबल ऑयल के लिए FAO इंडेक्स जून 2022 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर था, और अनाज के लिए भी इंडेक्स बढ़कर 27 महीने के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया.
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बिगड़ा मौसम है सबसे बड़ी वजह
जून, जुलाई और अगस्त तीनों ही महीनों में बारिश को लेकर जो अनुमान था, वो किसी तरह से खरा नहीं उतरा. इस साल मॉनसून बहुत अच्छा नहीं रहा है. 13 सितंबर तक, चार महीने के इस सीजन में पूरे देश में बारिश LPA (लॉन्ग पीरियड एवरेज) से 14.7% कम रही है. इसके अलावा, देश के 36 मौसम संबंधी सब-डिविजन में से 24 में बारिश में 10% से ज्यादा की कमी दर्ज की गई है. दक्षिणी राज्य और उनसे सटे महाराष्ट्र के मराठवाड़ा और विदर्भ इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं.


