अगर आप आने वाले दिनों में फ्लाइट से सफर करने की तैयारी कर रहे हैं तो आपकी जेब पर थोड़ा ज्यादा बोझ पड़ सकता है. 6 अक्टूबर से हवाई सफर महंगा हो गया है. देश की सबसे बड़ी एयरलाइन IndiGo ने घरेलू और इंटरनेशनल फ्लाइट्स पर फ्यूल सरचार्ज बढ़ाने का ऐलान किया है. घरेलू उड़ानों के लिए यह बढ़ोतरी दूरी के हिसाब से 100 रुपए से 350 रुपए तक है.
दरअसल, इसके पीछे सबसे बड़ी वजह ATF की बढ़ती कीमत है. पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण कच्चे तेल और जेट फ्यूल की कीमतों पर दबाव बढ़ा है. अब इस बढ़ती लागत का असर एयरलाइंस के साथ-साथ यात्रियों की जेब पर भी दिखाई देने लगा है.
कितना महंगा हुआ फ्लाइट टिकट?
IndiGo ने 6 अक्टूबर से घरेलू और इंटरनेशनल फ्लाइट्स पर फ्यूल चार्ज बढ़ाया है. घरेलू उड़ानों में दूरी के हिसाब से 100 रुपए से 350 रुपए तक एक्स्ट्रा चार्ज लगाया जाएगा.
यानी अगर आप आज से नया टिकट बुक करते हैं तो टिकट की टोटल कीमत में ये एक्स्ट्रा फ्यूल चार्ज जुड़ सकता है. हालांकि, कितनी बढ़ोतरी होगी, यह आपकी फ्लाइट की दूरी और रूट पर निर्भर करेगा.
सरकार क्यों कर रही है एयरलाइंस और तेल कंपनियों से बात?
बढ़ते ATF दाम को लेकर सरकार भी एक्टिव हो गई है. नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू ने 6 अक्टूबर को बताया कि मंत्रालय एयरलाइंस और OMCs के साथ बातचीत कर रहा है.
मंत्री के मुताबिक पश्चिम एशिया का संकट ATF की कीमतों पर काफी दबाव डाल रहा है और सरकार इस स्थिति से निपटने के लिए एयरलाइंस और तेल कंपनियों के साथ चर्चा कर रही है. यानी सरकार यह देख रही है कि बढ़ती ईंधन लागत का असर एयरलाइंस और यात्रियों पर किस तरह कम किया जा सकता है.
ATF इतना महंगा क्यों हो रहा है?
ATF वो ईंधन है जिसका इस्तेमाल विमानों को उड़ाने के लिए किया जाता है. एयरलाइन के कुल ऑपरेशनल खर्च में इसका बड़ा हिस्सा होता है. सरकार के मुताबिक ATF एयरलाइन के ऑपरेटिंग खर्च का करीब 40 फीसदी हिस्सा हो सकता है और ईंधन की कीमतों में ज्यादा उतार-चढ़ाव के दौरान यह हिस्सा 60 फीसदी तक पहुंच सकता है.
इस समय पश्चिम एशिया के संकट के कारण कच्चे तेल और जेट फ्यूल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव है. इसके अलावा कुछ रूट पर एयरस्पेस बंद होने से विमानों को लंबे रास्ते से जाना पड़ रहा है. इससे ईंधन की खपत और ऑपरेशन का खर्च दोनों बढ़ रहे हैं.
पहले भी सरकार दे चुकी है राहत
ATF की बढ़ती कीमतों के असर को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने जून 2026 में 10,000 करोड़ तक के प्राइस स्टेबलाइजेशन फंड को मंजूरी दी थी.
इसके तहत सरकारी तेल कंपनियों को ब्याज मुक्त एडवांस के जरिए ATF की कीमतों को स्थिर रखने में मदद की जानी है. सरकार ने बताया था कि पश्चिम एशिया संकट के दौरान अंतरराष्ट्रीय ATF की कीमत मार्च 2026 में करीब 60.50 रुपए प्रति लीटर से बढ़कर मई में करीब 142 रुपए प्रति लीटर हो गई थी.
क्या और महंगा हो सकता है हवाई सफर?
फिलहाल कहा नहीं जा सकता है कि हर एयरलाइन टिकट की कीमत कितनी बढ़ेगी. लेकिन अगर ATF की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं तो एयरलाइंस पर लागत का दबाव बढ़ता रहेगा.
इसका असर फ्यूल सरचार्ज, टिकट किराए और कुछ अतिरिक्त चार्ज के रूप में यात्रियों पर पड़ सकता है. दूसरी तरफ सरकार एयरलाइंस और OMCs से बातचीत कर रही है, इसलिए आने वाले दिनों में किसी राहत या कीमतों को स्थिर रखने के उपाय पर फैसला हो सकता है.
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