अमेरिकी सैनिकों की मौत पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बेहद सख्त मूड में हैं। उन्होंने ईरान को सीधी और बड़ी चेतावनी जारी की है। ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा है कि अब अमेरिकी सैनिकों की हत्या का बदला ईरान को कई गुना ज्यादा कीमत चुकाकर भुगतना होगा। उन्होंने इस संबंध में अपने शीर्ष रक्षा अधिकारियों को कड़े निर्देश भी जारी कर दिए हैं।
इस समय पश्चिम एशिया में युद्ध की लपटें काफी तेज हो चुकी हैं। दोनों ओर से लगातार घातक हमले किए जा रहे हैं। आइए जानते हैं कि इस पूरे टकराव की असल वजह क्या है और युद्ध किस खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है।
क्या युद्ध की आग में खाक हो जाएगा शांति का समझौता?
दोनों देशों के बीच कुछ समय पहले एक अंतरिम युद्धविराम हुआ था। लेकिन अब उस समझौते के पूरी तरह टूटने का खतरा मंडराने लगा है। ताजा हमलों ने शांति की सभी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
पेंटागन ने पुष्टि की है कि सप्ताहांत में अलग-अलग हमलों में तीन अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं। इनमें से दो सैनिक जॉर्डन के सैन्य अड्डे पर और एक उत्तरी इराक में मारा गया है। जॉर्डन में मारे गए दो सैनिकों की पहचान 19 वर्षीय प्राइवेट इसाबेला गोंजालेस और 25 वर्षीय लेफ्टिनेंट टायलर जेम्स फीहान के रूप में हुई है। एक अन्य सैनिक अभी भी लापता है।
इस युद्ध के पांच मुख्य बिंदु
ट्रंप का ट्रुथ सोशल पर सीधा संदेश: डोनाल्ड ट्रंप ने लिखा कि जब भी ईरान किसी अमेरिकी सैनिक की जान लेगा, उसे कई गुना भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। यह निर्देश युद्ध सचिव पीट हेगसेथ और ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन डेनियल केन को दे दिया गया है।
अमेरिकी सेना का नौवीं रात लगातार हमला: अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षा के लिए लगातार नौवीं रात ईरान के ठिकानों पर बमबारी की।
ईरान के कई शहरों में भारी धमाके: ईरानी मीडिया के मुताबिक तबरीज़, चाबहार, कोनारक, बंदर महशहर और बंदर इमाम खमेनी में जोरदार धमाके हुए हैं। तबरीज में एक व्यक्ति की मौत हुई है।
अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल दागता ईरान: ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कोर (आईआरजीसी) ने जॉर्डन के अकाबा हवाई अड्डे, कुवैत के अल-अदिरी कैंप और अली अल सालेम एयर बेस पर मिसाइलें दागी हैं।
समुद्र में भी मचा हाहाकार: होर्मुज जलडमरूमध्य में दो तेल टैंकरों में विस्फोट हुआ है। ओमान के तट पर भी एक अज्ञात मिसाइल हमले के बाद एक जहाज समुद्र में फंस गया है।
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क्या अब पानी के संकट से जूझेगी आम जनता?
यह युद्ध अब सिर्फ सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रह गया है। दोनों देश एक-दूसरे के नागरिक बुनियादी ढांचों को निशाना बना रहे हैं। कुवैत ने पुष्टि की है कि उसके एक वाटर डिसेलिनेशन (पानी को मीठा बनाने वाले) प्लांट पर लगातार दूसरे दिन हमला हुआ है, जिससे वहां भीषण आग लग गई। खाड़ी देशों में पीने के पानी की आपूर्ति इन्हीं प्लांटों से होती है, जिससे अब लाखों लोगों के सामने पानी का संकट खड़ा हो सकता है।
इस तनाव के बीच कूटनीति के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका बातचीत के लिए हमेशा तैयार है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर खतरा बर्दाश्त नहीं करेगा। वहीं ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने भी माना कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थों से शांति के प्रस्ताव मिले हैं।


