पाकिस्तान में होने वाली अमेरिका और ईरान की बातचीत पर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है. यह बातचीत सिर्फ मिडिल ईस्ट के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए भी बहुत अहम मानी जा रही है. इन बातचीत का रास्ता एक दो हफ्ते के युद्धविराम के बाद बना है, जो अभी भी लागू है, लेकिन हालात पूरी तरह स्थिर नहीं हैं. इजरायल की तरफ से हिज़्बुल्लाह पर लगातार हमले और लेबनान को इस समझौते में शामिल करने को लेकर विवाद इस शांति प्रक्रिया को कमजोर कर रहे हैं.
अमेरिका-ईरान बातचीत से जुड़ी 10 बड़ी बातें
- व्हाइट हाउस के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच पहली बैठक पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शनिवार (11 अप्रैल 2026) की सुबह होगी. इस बातचीत में अमेरिका की तरफ से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर शामिल होंगे.
- पाकिस्तान रवाना होने से पहले अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने उम्मीद जताई कि बातचीत सकारात्मक रहेगी.
- ईरान ने अभी तक आधिकारिक तौर पर अपने प्रतिनिधियों के नाम नहीं बताए हैं, लेकिन कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ इस टीम का नेतृत्व कर रहे हैं.
- अमेरिका की तरफ से एक 15 बिंदुओं वाला प्रस्ताव तैयार किया गया है, लेकिन इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है. खबरों के अनुसार, इस प्रस्ताव में ईरान से परमाणु हथियार छोड़ने, अपने यूरेनियम के भंडार को खत्म करने, सैन्य क्षमता पर सीमाएं लगाने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने की मांग शामिल है.
- अमेरिका-ईरान के बीच होने वाली पूरी बातचीत में सबसे बड़ा विवाद लेबनान को लेकर है. ईरान का कहना है कि युद्धविराम में लेबनान भी शामिल है और हिज़्बुल्लाह पर हमले इस समझौते का उल्लंघन हैं.
- पाकिस्तान भी लेबनान को सीजफायर में शामिल करने वाली बात का समर्थन कर रहा है. वहीं, अमेरिका और इजरायल का मानना है कि लेबनान इस युद्धविराम का हिस्सा नहीं है.
- ईरान की तरफ से यह भी साफ कर दिया गया है कि जब तक लेबनान में पूरी तरह युद्धविराम नहीं होता और विदेशों में रोके गए उसके पैसे वापस नहीं मिलते तब तक बातचीत शुरू नहीं हो सकती.
- अमेरिका ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को नहीं खोला तो यह युद्धविराम टूट सकता है. राष्ट्रपति ट्रंप पहले ही कह चुके हैं कि इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों पर कोई शुल्क नहीं लगाया जा सकता.
- यह बातचीत एक ऐसे समय पर हो रही है जब हालात बहुत नाजुक हैं. अब यह देखना होगा कि यह बैठक तनाव कम करने में सफल होती है या फिर स्थिति और बिगड़ती है.
- पाकिस्तान में होने वाली बातचीत को लेकर पूरी दुनिया में हलचल का माहौल है. बता दें कि 40 दिन के बाद हुए सीजफायर के बाद भी आशंका जताई जा रही है कि ये सीजफायर काफी नाजुक है, जो कभी भी टूट सकता है.
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