सदर थाना क्षेत्र के तेली मोहल्ला में घर में मिले कंकाल का पोस्टमार्टम तीन डॉक्टरों के पैनल ने किया। इनमें डॉ. अनुज कुमार, डॉ. अमित कुमार और डॉ. भावना गुप्ता शामिल थे। पोस्टमॉर्टम करीब 45 मिनट तक चला।
इस दौरान हड्डियों के ऊपर से नीचे तक छह एक्सरे किए गए, ताकि अगर कहीं कोई चोट के निशान हों तो पता चल सके। लेकिन कहीं चोट का निशान नहीं मिला। पोस्टमार्टम करने वाले पैनल में शामिल डॉ. अनुज ने बताया फोरेंसिक जांच में भी ऐसे मामले में यह पता करना संभव नहीं होता कि मौत कैसे हुई।
ऐसे मामले में तभी मौत का कारण पता चल सकता है जब हड्डी पर चोट के निशान हों। चूंकि शरीर के कोमल ऊतक खत्म हो चुके हैं। अब लड़की के पिता के बयान से ही सच सामने आ सकता है। उन्होंने बताया कि जब कंकाल मिलता है तो मौत का कारण पता लगाने की प्रक्रिया को फॉरेंसिक एंथ्रोपोलॉजी कहा जाता है।
सबसे पहले हड्डियों पर चोट के निशान देखे जाते हैं। अगर हड्डियों पर कटने के निशान हैं तो किस तरह के हैं। कोई धारदार हथियार तो इस्तेमाल नहीं हुआ। फिर देखा जाता है कि अगर हड्डियां टूटी हुई हैं या उनमें दरारें हैं तो यह किसी भारी चीज से प्रहार तो नहीं।






