अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार (12 अप्रैल 2026) को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नाकाबंदी का ऐलान किया था. यह फैसला तब लिया गया, जब अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता बिना किसी समझौते के खत्म हो गई. अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए कहा कि नाकाबंदी के पहले 24 घंटों में कोई भी जहाज इसे पार नहीं कर सका. उन्होंने बताया कि 6 जहाजों ने अमेरिकी सेना के निर्देश का पालन किया और वापस ईरानी बंदरगाह की ओर लौट गए. हालांकि, उससे पहले 20 जहाज पार हो चुके थे.
नाकाबंदी के पहले दिन, यानी मंगलवार (14 अप्रैल 2026) को समुद्र के रास्ते गुजरने की कोशिश करने वाले कम से कम 8 जहाजों में एक चीनी टैंकर भी शामिल था. एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि मंगलवार को ओमान की खाड़ी में एक अमेरिकी युद्धपोत ने ईरान के चाबहार बंदरगाह से निकलने की कोशिश कर रहे दो तेल टैंकरों को रोक दिया. इनमें से एक जहाज ‘रिच स्टारी’ है, जिसके मालिक शंघाई ज़ुआनरन शिपिंग कंपनी हैं. उस पर पहले ही अमेरिका ने ईरान के साथ कारोबार करने के आरोप में प्रतिबंध लगा रखा है. हालांकि, कंपनी से तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी.
ईरान-अमेरिका युद्ध शुरू होने के बाद की स्थिति
केप्लर डेटा के मुताबिक, ‘रिच स्टारी’ एक मीडियम साइज का टैंकर है, जिसमें करीब 2.5 लाख बैरल मेथनॉल भरा हुआ है. यह माल यूनाइटेड अरब अमीरात के हमरियाह बंदरगाह से लोड किया गया था. LSEG के डेटा के अनुसार, अमेरिका की ओर से प्रतिबंधित एक और बड़ा जहाज ‘एलिसिया’ बुधवार (15 अप्रैल 2026) को इस रास्ते से खाड़ी में घुसते हुए देखा गया. केप्लर के अनुसार, यह एक बहुत बड़ा क्रूड टैंकर है, जो करीब 20 लाख बैरल तेल ले जाने की क्षमता रखता है. फिलहाल यह खाली है और गुरुवार (16 अप्रैल 2026) को इराक जाकर तेल लोड करने की योजना है. इस नाकाबंदी के कारण शिपिंग कंपनियों, तेल कंपनियों और बीमा कंपनियों के बीच अनिश्चितता और बढ़ गई है. इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल की ओर से ईरान पर हमले के बाद से इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों की संख्या बहुत कम हो गई है. पहले जहां हर दिन 130 से ज्यादा जहाज गुजरते थे, अब यह संख्या काफी घट गई है.

