Islamabad Talks 2026: पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच हुई बातचीत बिना किसी समझौते के खत्म हो गई है. इसके बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अब जंग फिर से शुरू होगी? फिलहाल ऐसा होने की संभावना कम है क्योंकि 21 अप्रैल तक सीजफायर जारी रहने की बात कही जा रही है और पाकिस्तान इस समझौते का गारंटर बनकर सामने आया है.
न्यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान सरकार के शीर्ष सूत्रों ने कहा,“बातचीत भले ही औपचारिक समझौते में नहीं बदली हो, लेकिन दोनों पक्षों के बीच एक व्यापक लेकिन अनौपचारिक सहमति बनी हुई है. 7 अप्रैल से शुरू हुआ 15 दिन का सीजफायर 21 अप्रैल तक जारी रहेगा और इस दौरान किसी तरह का उल्लंघन नहीं होगा.”
ईरान ने अपनाया तनाव कम करने का रुख
सूत्रों के मुताबिक, ईरान इस समय तनाव कम करने की दिशा में कदम उठा रहा है. 21 अप्रैल की समयसीमा तक पाकिस्तान ने गारंटर की भूमिका निभाई है. अमेरिका का शांति प्रस्ताव अभी भी टेबल पर है और ईरान की औपचारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है. इस स्थिति में 21 अप्रैल तक किसी नए तनाव या हमले की संभावना नहीं दिख रही है.
पाकिस्तान और अमेरिका के दबाव में ईरान
सूत्रों का कहना है कि खाड़ी क्षेत्र में पाकिस्तान की सैन्य मौजूदगी और अमेरिका की अगुवाई में चल रही कूटनीति, दोनों मिलकर ईरान पर दबाव बना रहे हैं. ईरान किसी भी आक्रामक कदम से बच रहा है क्योंकि ऐसा करने से वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ सकता है और पाकिस्तान की दोतरफा दबाव रणनीति को मजबूती मिल सकती है.
शांति वार्ता में क्या हुआ?
अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता 12 अप्रैल 2026 को पाकिस्तान के इस्लामाबाद में खत्म हुई. यह वार्ता करीब 6 हफ्ते से चल रही जंग को खत्म करने के मकसद से की गई थी. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में 21 घंटे तक चली इस मैराथन बातचीत के बावजूद कोई समझौता नहीं हो सका और अगली वार्ता की भी फिलहाल कोई योजना नहीं है.
परमाणु मुद्दा बना सबसे बड़ा विवाद
वार्ता टूटने की सबसे बड़ी वजह ईरान का अमेरिका की शर्तों को मानने से इनकार करना रहा. अमेरिका चाहता था कि ईरान “जीरो एनरिचमेंट” पर सहमत हो जाए और अपने यूरेनियम भंडार को खत्म करे.

