अमित कश्यप हत्याकांड में दोषी करार दी गई उसकी पत्नी रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को बुधवार सुबह न्यायालय परिसर लाया गया। फैसले से पहले रविता के चेहरे पर पछतावे के भाव नहीं दिखे। हालांकि एडीजे जयवीर सिंह नागर द्वारा दोनों को दोषी करार दिए जाने के बाद वह उदास नजर आई। जेल लौटने के बाद उसने किसी से बात नहीं की और रात का खाना लेने के बावजूद खाया नहीं।

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आरोपी प्रेमी अमरदीप
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एडीजीसी फरजाना मकसूद ने दोनों दोषियों को फांसी की सजा देने की अपील की। इस पर एडीजे ने दोषियों के आचरण, आर्थिक-सामाजिक स्थिति का आकलन और मानसिक स्थिति का परीक्षण कराने के आदेश दिए।

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Meerut murder
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पुलिस ने अमित की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद प्राथमिकी दर्ज कर 74 दिन में जांच पूरी कर आरोप-पत्र दाखिल किया था। 542 दिन और 86 तारीखों के बाद अमित के परिजनों को इंसाफ मिला। अब उन्हें दोनों दोषियों की सजा का इंतजार है। इस मामले में अमरदीप की मोबाइल लोकेशन, दोनों दोषियों की सीडीआर, डिजिटल साक्ष्य और गवाहों के बयान अहम साबित हुए।

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आरोपी पत्नी
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अदालत ने फैसले की प्रति में लिखा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्थापित परिस्थितिजन्य साक्ष्य के सिद्धांतों के तहत मामला संदेह से परे साबित होता है। गवाह मुनेश और मोनू कश्यप के बयानों तथा सीडीआर से रविता और अमरदीप के संबंध और हत्या की वजह साबित हुई। गवाह सुखपाल और पिंटू ने अमित की चारपाई से अमरदीप द्वारा खरीदे गए सांप की बरामदगी की पुष्टि की। गला दबाकर हत्या के बाद साक्ष्य छिपाने और पुलिस को गुमराह करने के लिए चारपाई पर सांप छोड़ा गया था, ताकि मौत को सर्पदंश दिखाया जा सके।

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आरोपी पत्नी
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सीडीआर से खुला राज, रात 1:50 बजे घर में था अमरदीप
जज ने फैसले में लिखा कि गवाह मुनेश ने साबित किया कि अमित को अंतिम बार अभियुक्तगण के घर देखा गया था। मोबाइल फोन की सीडीआर और कॉल लोकेशन से पता चला कि वारदात की रात करीब 1:50 बजे अमरदीप अमित-रविता के घर पर मौजूद था और इसके तुरंत बाद अमित की हत्या कर दी गई। अमरदीप के सपेरे से सांप खरीदने की बात गवाह कृष्ण के बयान से भी साबित हुई।

