महाराष्ट्र में सरकारी नौकरी की परीक्षाएं कराने वाले महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर चल रहे विवाद के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बड़ा कदम उठाया है। पेपर लीक और परीक्षा से जुड़ी गड़बड़ियों के आरोपों के बाद फडणवीस ने एमपीएससी के पूर्व और मौजूदा अध्यक्षों व सदस्यों के कामकाज की जांच के लिए एक कमेटी बनाने की सिफारिश की है। सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने मंगलवार को अपनी यह सिफारिश राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा को भेजी है।
रिटायर्ड हाईकोर्ट जज करेंगे कमेटी की अगुवाई
मुख्यमंत्री की सिफारिश के मुताबिक जांच कमेटी की अध्यक्षता हाईकोर्ट के एक सेवानिवृत्त जज को सौंपी जानी चाहिए। कमेटी को अपनी जांच पूरी कर तीन महीने के भीतर रिपोर्ट देनी होगी। इसके बाद कमेटी की रिपोर्ट में जो तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
संविधान के अनुच्छेद 317 के तहत होगी जांच
यह सिफारिश संविधान के अनुच्छेद 317 के तहत की गई है। यह अनुच्छेद लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों को हटाने या उन्हें निलंबित करने से जुड़ा है। सरकार का कदम इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि एमपीएससी की कार्यप्रणाली को लेकर लंबे समय से सवाल उठ रहे हैं और अभ्यर्थी आयोग के शीर्ष पद पर बैठे लोगों की भूमिका की जांच की मांग कर रहे हैं।
पुणे में छह दिन से प्रदर्शन, अध्यक्ष के इस्तीफे की मांग
एमपीएससी अभ्यर्थियों का प्रदर्शन पुणे में लगातार छह दिनों से चल रहा है। इस आंदोलन को अलग-अलग वर्गों और राजनीतिक हलकों से भी समर्थन मिल रहा है। प्रदर्शनकारियों की कई मांगें हैं। जिनमें एमपीएससी की परीक्षाओं का ऑब्जेक्टिव या डिस्क्रिप्टिव फॉर्मेट तय करने की मांग भी शामिल है। हालांकि, आंदोलन की सबसे बड़ी मांग एमपीएससी के अध्यक्ष विवेक भीमनवार के इस्तीफे की है।
राहुल गांधी भी अभ्यर्थियों से कर सकते हैं मुलाकात
एमपीएससी के मुद्दे ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी के 7 या 8 अक्टूबर को आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों से मिलने की संभावना है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा और जोर पकड़ सकता है।
एमपीएससी के सचिव की प्रतिनियुक्ति भी खत्म कर चुकी है सरकार
विवाद के बीच महाराष्ट्र सरकार ने एमपीएससी के सचिव महेंद्र उत्तमराव हरपालकर की प्रतिनियुक्ति भी समाप्त कर दी है। सरकार के इस फैसले को आयोग के कामकाज को लेकर उठ रहे सवालों के बीच एक अहम कदम माना जा रहा है।
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30 सितंबर को सरकार ने किया था न्यायिक जांच का एलान
एमपीएससी अभ्यर्थियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की थी। इसके बाद 30 सितंबर को महाराष्ट्र सरकार ने कहा था कि MPSC के पूर्व और मौजूदा अध्यक्षों और सदस्यों के कामकाज की तीन महीने के भीतर न्यायिक जांच कराई जाएगी। अभ्यर्थी इसी तरह की जांच की मांग कर रहे थे और सरकार ने इसे संविधान के अनुच्छेद 317 के तहत कराने की बात कही थी।


