हाल ही में जावेद अख्तर ने अल्पसंख्यकों के मुद्दों पर बोलने वाले ‘सेक्युलर बुद्धिजीवियों’ और मुस्लिम समुदाय के नेताओं पर सवाल उठाए हैं। साथ ही उन्होंने चल रहे ‘वंदे मातरम्’ विवाद को लेकर अपनी बात साफ कर दी है।
तीन तलाक मामले पर क्या बोले जावेद?
इंडियन एक्सप्रेस हिंदी को दिए एक इंटरव्यू में जावेद अख्तर ने मुस्लिम पर्सनल लॉ और तीन तलाक को लेकर बात की। उन्होंने कहा, ‘मुस्लिम पर्सनल लॉ 1937 में आया था। हमें 1947 में आजादी मिली। तो आपने इसमें कोई बदलाव क्यों नहीं किया? तीन तलाक पर रोक लगाने के लिए आपको बीजेपी की जरूरत क्यों पड़ी? यह शर्म की बात है। यह कैसा सेक्युलरिज्म है?’
जावेद अख्तर से जब पूछा गया कि उनकी आलोचना को उनकी नास्तिक सोच के बावजूद बहुसंख्यक वर्ग के नैरेटिव को बढ़ावा देने के तौर पर देखा जाता है, तो उन्होंने कहा, ‘यह दुख की बात है कि मुस्लिम समुदाय का एक बहुत छोटा हिस्सा ही समुदाय के भीतर मौजूद सामाजिक समस्याओं और कमियों के खिलाफ आवाज उठाता है। पहले अपना घर ठीक करें, फिर हमें दूसरों की आलोचना करने का हक मिलता है।’

