भाजपा ने उत्तर प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए सोमवार को आठ उम्मीदवारों के नामों का एलान किया। पार्टी ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा समेत अपने किसी भी निवर्तमान राज्यसभा सांसद को दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया। पुरी का नाम सूची से बाहर होने के बाद आने वाले हफ्तों में केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल की अटकलों को भी बल मिल सकता है।
हरदीप सिंह पुरी का कार्यकाल नवंबर में समाप्त होने वाला है। उनके अलावा अरुण सिंह, सीमा द्विवेदी, नीरज शेखर, बृज लाल और गीता शाक्य भी भाजपा की नई सूची में शामिल नहीं हैं। दिनेश शर्मा भी इस सूची में नहीं हैं। वह पहले उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं और फिलहाल अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह के उपराज्यपाल हैं।
क्या मंत्रिमंडल में फेरबदल की संभावना है?
भाजपा द्वारा पुरी और वर्मा को दोबारा मनोनीत न करने के फैसले ने इस अटकल को भी हवा दी है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल हो सकता है। संविधान के अनुच्छेद 75(5) के अनुसार, जो मंत्री लगातार छह महीने तक संसद के किसी भी सदन का सदस्य नहीं रहता, उसे पद छोड़ना पड़ता है। पुरी और वर्मा का राज्यसभा कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त हो रहा है। इस स्थिति में में उत्तर प्रदेश की सूची से उनका नाम हटाए जाने से यह सवाल उठ रहा है कि क्या उन्हें संसद में प्रवेश का कोई और रास्ता दिया जाएगा या भाजपा व्यापक फेरबदल की तैयारी कर रही है।
हालांकि, पार्टी ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि इस कदम का दोनों मंत्रियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा। दोनों ही नेता राज्यसभा कार्यकाल खत्म होने के बाद अगले साल 25 मई तक मंत्री पद पर बने रह सकते हैं। इस दौरान अप्रैल, 2027 में केरल की तीन राज्यसभा सीटें खाली होंगी, लेकिन इन सीटों पर भाजपा की जीत की संभावना नगण्य है। वहीं, अक्तूबर, 2027 में पुदुचेरी की एक सीट खाली होगी। ये सीट भाजपा के खाते में ही है, लेकिन यहां से इन नेताओं के चुने जाने की संभावना कम है।
भाजपा ने इन आठ नेताओं को बनाया उम्मीदवार
भाजपा ने उत्तर प्रदेश से धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यसागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार को उम्मीदवार बनाया है। उत्तर प्रदेश में 10 राज्यसभा सीटों के लिए 16 अक्तूबर को मतदान होगा। विधानसभा में दलों की मौजूदा संख्या के आधार पर भाजपा के आठ और समाजवादी पार्टी के दो सीटें जीतने की उम्मीद है।
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सामाजिक समीकरण
भाजपा की सूची में तीन अन्य पिछड़ा वर्ग, दो अनुसूचित जाति और तीन सवर्ण वर्ग के उम्मीदवार शामिल हैं। उम्मीदवारों के सामाजिक प्रतिनिधित्व में लोधी, पाल और कुर्मी समुदायों को भी जगह दी गई है। प्रकाश पाल भाजपा के उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग मोर्चा के अध्यक्ष हैं। वह पहले कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र में पार्टी के संगठन की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।
जौनपुर से दलित नेता विद्यासागर सोनकर पूर्व सांसद और विधान परिषद सदस्य रह चुके हैं। वह उत्तर प्रदेश विधान परिषद में उपनेता और भाजपा के प्रदेश महासचिव की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।
दो महिलाओं को भी टिकट
भाजपा ने सूची में दो महिला उम्मीदवारों को जगह दी है। इनमें बाराबंकी की पूर्व सांसद प्रियंका सिंह रावत और झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार की बेटी श्रुति गंगवार शामिल हैं। प्रियंका सिंह रावत उत्तर प्रदेश भाजपा की उपाध्यक्ष और पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सदस्य हैं। उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पीएल पुनिया को करीब दो लाख मतों से हराया था।
आईआईटी से स्नातक श्रुति गंगवार बरेली में अर्बन कोऑपरेटिव बैंक की अध्यक्ष हैं और बरेली-बहेड़ी क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होंने अपनी उम्मीदवारी को महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास और नीतियां बनाने में महिलाओं की अधिक भागीदारी की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
दो ब्राह्मण और एक ठाकुर उम्मीदवार
भाजपा की सूची में सवर्ण वर्ग से दो ब्राह्मण और एक ठाकुर नेता शामिल हैं। राम प्रताप सिंह चौहान भाजपा के प्रदेश महासचिव और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र प्रभारी हैं। वह 2017 से 2022 तक आगरा की एत्मादपुर विधानसभा सीट से विधायक रहे हैं।
राधाकांत ओझा प्रयागराज स्थित इलाहाबाद हाईकोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता हैं। वह हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष के रूप में दो बार चुने जा चुके हैं। गोपी कृष्ण पांडेय भाजपा के वरिष्ठ संगठनकर्ता हैं और जमीनी स्तर पर पार्टी के अभियानों तथा संगठन से जुड़े काम में सक्रिय रहे हैं।


