लोकप्रिय विषय मौसम क्रिकेट ऑपरेशन सिंदूर क्रिकेट स्पोर्ट्स बॉलीवुड जॉब - एजुकेशन बिजनेस लाइफस्टाइल देश विदेश राशिफल आध्यात्मिक अन्य
---Advertisement---

US के लेजर हथियार ने बढ़ाई ताकत, ड्रोन के खिलाफ ऐसे करता है काम

[wplt_featured_caption]

---Advertisement---

मिडिल ईस्ट में ड्रोन और मिसाइलों का खतरा बढ़ने के बीच अमेरिका हाई-एनर्जी लेजर वेपन की क्षमता बढ़ाने पर काम कर रहा है. अमेरिकी नौसेना लंबे समय से ऐसे सिस्टम डेवलप कर रही है, जो बिना मिसाइल दागे ड्रोन और दूसरे हवाई खतरों को टारगेट बना सकते हैं.

अमेरिकी नौसेना का HELIOS ऐसा ही एक सिस्टम है. इसे 60 किलोवाट की कैटेगरी का हाई-एनर्जी लेजर वेपन बनाया गया है. इसका इस्तेमाल ड्रोन को निशाना बनाने, उनके सेंसर को बेअसर करने और निगरानी से जुड़े दूसरे खतरों से निपटने के लिए किया जा सकता है.

क्या है अमेरिका का HELIOS लेजर हथियार?

HELIOS को अमेरिकी नौसेना के युद्धपोतों के लिए डेवलप किया गया है. इसमें किसी मिसाइल या दूसरे इंटरसेप्टर को टारगेट तक भेजने के बजाय एनर्जी रे का इस्तेमाल किया जाता है. अमेरिकी नौसेना के अनुसार, HELIOS का मकसद UAV यानी ड्रोन, छोटी नावों और दुश्मन के ISR सेंसर जैसे लक्ष्यों से निपटना है.

सिस्टम को आगे चलकर ज्यादा ताकतवर बनाने की क्षमता भी रखी गई है. अमेरिकी नौसेना ने USS Preble युद्धपोत पर HELIOS सिस्टम लगाया है. 2025 की एक अमेरिकी रक्षा रिपोर्ट के मुताबिक, इस सिस्टम का ड्रोन लक्ष्य के खिलाफ परीक्षण भी किया जा चुका है.

लेजर से ड्रोन कैसे निशाना बनाया जाता है?

लेजर हथियार में पहले रडार या सेंसर की मदद से लक्ष्य का पता लगाया जाता है. इसके बाद ऑप्टिकल सिस्टम ड्रोन को ट्रैक करता है और लेजर बीम को उसके कमजोर हिस्से पर केंद्रित किया जाता है. अमेरिकी नौसेना के एक तकनीकी विवरण के मुताबिक, ऑपरेटर ड्रोन की तस्वीर देखकर उसके कमजोर हिस्से यानी एम पॉइंट की पहचान कर सकता है. इसके बाद तेज स्पीड से घूमने वाले मिरर लेजर बीम को उसी स्थान पर केंद्रित रखते हैं.

इस तकनीक का बड़ा फायदा यह है कि लक्ष्य को रोकने के लिए हर बार अलग मिसाइल दागने की जरूरत नहीं होती. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि लेजर की हर फायरिंग पूरी तरह मुफ्त होती है. सिस्टम को लगातार पर्याप्त बिजली और कूलिंग की जरूरत होती है.

Xbox जैसा कंट्रोलर क्यों इस्तेमाल होता है?

लेजर हथियारों की सबसे दिलचस्प बातों में से एक उनका कंट्रोल सिस्टम है. अमेरिकी नौसेना पहले से ऐसे लेजर सिस्टम का इस्तेमाल और परीक्षण कर चुकी है, जिन्हें वीडियो-गेम जैसे कंट्रोलर से संचालित किया जाता था. 2014 में अमेरिकी नौसेना ने फारस की खाड़ी में अपने  लेजर वेपन सिस्ट को ऑपरेट संचालन किया था. उस सिस्टम के कंट्रोल के लिए वीडियो-गेम जैसा कंट्रोलर इस्तेमाल किया गया था.

परीक्षण में लेजर से ड्रोन और समुद्री लक्ष्यों को निशाना बनाया गया था. इस तरह का कंट्रोलर ऑपरेटर के लिए लक्ष्य को ट्रैक करने और हथियार की दिशा नियंत्रित करने को आसान बना सकता है. हालांकि, किसी वास्तविक युद्ध प्रणाली को सिर्फ एक गेम कंट्रोलर के समान दिखने वाले उपकरण से जोड़कर देखना सही नहीं होगा. इसके पीछे सेंसर, फायर-कंट्रोल सिस्टम और कई दूसरे सैन्य सिस्टम भी काम करते हैं.

मिसाइल की जगह लेजर क्यों?

ड्रोन की लागत कई बार आधुनिक इंटरसेप्टर मिसाइल से काफी कम हो सकती है. ऐसे में महंगी मिसाइल से हर छोटे ड्रोन को रोकना सैन्य दृष्टि से महंगा पड़ सकता है. लेजर सिस्टम इस समस्या का एक संभावित समाधान है. इसमें पारंपरिक गोला-बारूद खत्म होने की समस्या नहीं होती, लेकिन इसकी अपनी सीमाएं हैं. सिस्टम को बड़ी मात्रा में बिजली चाहिए और खराब मौसम, धूल, धुंध या वातावरण में मौजूद दूसरे कण लेजर की प्रभावशीलता को प्रभावित कर सकते हैं. अमेरिकी नौसेना खुद मानती है कि लंबी दूरी और वातावरण की स्थिति लेजर से लक्ष्य की तस्वीर और ट्रैकिंग को प्रभावित कर सकती है.

क्या होर्मुज में अमेरिका ने इसे तैनात कर दिया है?

अमेरिकी नौसेना के आधिकारिक रिकॉर्ड से यह पुष्टि होती है कि HELIOS सिस्टम को युद्धपोतों पर विकसित, लगाया और परीक्षण किया गया है. अमेरिकी नौसेना के रिकॉर्ड में USS प्रेबल पर इसकी तैनाती और ड्रोन के खिलाफ परीक्षण का उल्लेख है. अमेरिकी नौसेना के 2026 के रिकॉर्ड में मध्य पूर्व में अमेरिकी युद्धपोतों की तैनाती भी दर्ज है. उदाहरण के लिए, USS Mason अगस्त 2026 में अमेरिकी 5th Fleet के क्षेत्र में तैनात था.

]
Source link

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment