प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार से एक अक्तूबर तक चार बार अपने मंत्रियों के शिक्षक की भूमिका में होंगे। इस कड़ी में प्रधानमंत्री अपने मंत्रियों को चिंतन शिविर में प्रभावी संवाद करने की कला ही नहीं जनविश्वास को जनाधार में बदलने का गुर भी सिखाएंगे। इस दौरान मोदी मंत्रियों को विभागीय सफलता हासिल करने के टिप्स देने के अलावा ‘शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक स्तर पर व्यक्तित्व को निखार कर स्व विकास का मंत्र भी देंगे।
गौरतलब है कि पीएम ने अपने सभी मंत्रियों के लिए सेवा तीर्थ में चिंतन शिविर का आयोजन किया है। यह शिविर 23, 24, 30 सितंबर और एक अक्तूबर को होगा। इसके लिए 67 मंत्रियों को अलग-अलग चार समूहों में बांटा गया है। इन समूहों का नेतृत्व अलग-अलग तीन तीन केंद्रीय मंत्री करेंगे।
ऐसे चलेगा कार्यक्रम
चार दिन के शिविर के लिए चार थीम तय किए गए हैं। पहले दिन का थीम व्यक्तित्व विकास के जरिये स्व विकास, दूसरे दिन का जनविश्वास से जनाधार, तीसरे दिन (30 सितंबर) का विभागीय सफलता और अंतिम दिन का थीम प्रभावी संवाद होगा।
यह है खास मकसद
इससे पहले पीएम मोदी ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान 2015 में चिंतन शिविर के जरिए कामकाज में तेजी लाने, पारदर्शिता बढ़ाने के टिप्स दिए थे। तब उन्होंने नए मंत्रियों को गवर्नेस का गुर सिखाया था। इस बार की बैठक का मकसद लोगों को मोदी में आए सकारात्मक बदलावों पर लोगों से प्रभावी संवाद करने, लोगों के सरकार के कार्यकाल में विभिन्न क्षेत्रों सरकार के प्रति विश्वास को कायम रखते हुए इसे जनाधार में बदलने का तरीका सिखाने के लिए है।
राज्य मंत्रियों के दूसरे समूह से संवाद
चिंतन शिविर के बीच प्रधानमंत्री राज्य मंत्रियों के दूसरे समूह से 28 फरवरी को संवाद करेंगे। इस दौरान मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा होगी और अर्थव्यवस्था पर प्रधानमंत्री राज्य मंत्रियों की राय लेने के साथ कुछ दिशा निर्देश जारी करेंगे। पीएम 20 राज्य मंत्रियों के एक समूह से सात सितंबर को समीक्षा बैठक कर चुके हैं।

