रघुबीर यादव बताते हैं कि पहली बार ‘पंचायत’ की स्क्रिप्ट पढ़ने के बाद उन्होंने मेकर्स से कहा था कि- ‘इसमें तो एक्टिंग की गुंजाइश नहीं है।’ सुनने में यह बात थोड़ी अजीब लग सकती है, लेकिन रघुबीर का मतलब साफ था। उन्हें लगा कि इस कहानी और किरदार को अभिनय के जरिए नहीं दिखाया जा सकता। यहां तो किरदार को आत्मसाध करके परदे पर जीना होगा। जानें, इस सीरीज के बारे में और क्या बोले रघुबीर?
कैसे मिली ‘पंचायत’ वेब सीरीज?
‘पंचायत’ से जुड़ने का किस्सा बताते हुए रघुबीर कहते हैं, ‘कुछ नहीं, बस ऐसे ही मिल गई थी। ये लोग लिख रहे थे। पता नहीं, कैसे मुझे बुला लिया। मैंने उनसे यही कहा कि जिस तरह इसे लिखा गया है, इन जिंदगियों से मैं अच्छी तरह से वाकिफ हूं। मैं बिहार, राजस्थान, यूपी, एमपी सब जगह रहा हूं। वहां की जुबान की मुझे थोड़ी जानकारी है। वहां की जुबान का जो टेस्ट है, वो मुझे पता है। जुबान का जो संगीत है, वो भी मुझे पता है। हालांकि, स्क्रिप्ट पढ़ने के बाद मुझे लगा कि इस किरदार में बनावटी अभिनय की गुंजाइश नहीं है। मैंने राइटर्स से कहा कि भैया, इसमें तो एक्टिंग की जरा भी गुंजाइश नहीं है। अगर एक्टिंग करोगे तो मारे जाओगे। इन किरदारों में तो हमें डूबकर ही काम करना पड़ेगा।’