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सस्ती दवाओं पर राष्ट्रपति ट्रंप का बड़ा दांव:जेनरस मॉडल से जुड़ेंगे अमेरिका के सभी 50 राज्य, क्या है योजना? – Donald Trump Medicaid Drug Pricing Mfn Generous Model 50 States

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शुक्रवार को मेडिकेड की दवा कीमतों से जुड़ी एक बड़ी योजना का एलान करने वाले हैं। इसमें अमेरिका के सभी 50 राज्यों के शामिल होने की बात कही गई है। इस योजना को मेडिकेड जेनरस मॉडल नाम दिया गया है। इसका मकसद मेडिकेड कार्यक्रम में कुछ दवाओं की कीमतों को दूसरे देशों में चुकाई जाने वाली कम कीमतों के करीब लाना है। ट्रंप प्रशासन का दावा है कि इससे मेडिकेड को दवाओं की खरीद पर अरबों डॉलर की बचत हो सकती है।

योजना में क्या बदलेगा?

इस मॉडल के तहत कुछ चुनिंदा दवाओं के लिए ‘मोस्ट फेवर्ड नेशन’ (एमएफएन) कीमत लागू करने की योजना है। आसान भाषा में समझें तो अमेरिका इन दवाओं के लिए उन देशों में चुकाई जाने वाली कीमतों को आधार बनाएगा, जहां कीमत कम है। राष्ट्रपति ट्रंप ने पिछले साल एक कार्यकारी आदेश के जरिए ऐसी नीति शुरू करने की पहल की थी। उस नीति का उद्देश्य अमेरिका को किसी दवा के लिए दुनिया में सबसे कम कीमत चुकाने वाले देश के बराबर कीमत दिलाना था।


  • कुछ चुनिंदा दवाओं की कीमत दूसरे देशों की कम कीमतों से जोड़ी जाएगी। सभी 50 राज्यों को मेडिकेड से जुड़ी इस योजना में शामिल किया जाएगा।

  • ट्रंप प्रशासन का दावा है कि इससे मेडिकेड के दवा खर्च में अरबों डॉलर की बचत होगी। कम कीमतों से उन राज्य सरकारों के बजट को भी राहत मिल सकती है, जो मेडिकेड कार्यक्रम को फंड करती हैं।

  • अमेरिका में मेडिकेड कम आय वाले लोगों के लिए राज्य और संघीय सरकार द्वारा चलाया जाने वाला स्वास्थ्य कार्यक्रम है। मेडिकेड के मरीज दवा लेते समय आम तौर पर कुछ डॉलर का मामूली सह-भुगतान करते हैं।

  • योजना का असर केवल सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं तक सीमित रहेगा; सरकारी स्वास्थ्य कार्यक्रमों से बाहर के लोगों के लिए कम कीमत की मांग भी उठ रही है।

क्या बचत के दावे की पुष्टि हुई है?

यही इस योजना का सबसे बड़ा सवाल है। ट्रंप प्रशासन ने दवाओं की कीमत कम करने से बड़ी बचत होने का दावा किया है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि वास्तविक बचत अभी स्पष्ट नहीं है। इसकी वजह यह है कि प्रशासन और दवा कंपनियों के बीच हुए समझौतों की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। रॉबर्ट वुड जॉनसन फाउंडेशन की वरिष्ठ नीति सलाहकार कैथी हेम्पस्टेड ने एसोसिएटेड प्रेस से कहा कि प्रशासन पर अपने बचत संबंधी दावों के समर्थन में ज्यादा विस्तृत आंकड़े देने का दबाव है। उनका कहना है कि जब समझौतों में क्या तय हुआ, यह ही स्पष्ट नहीं है, तो कांग्रेस के लिए उन व्यवस्थाओं को कानून का रूप देने पर कार्रवाई करना भी मुश्किल है।

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क्यों चर्चा में 529 अरब डॉलर की बचत का अनुमान?

व्हाइट हाउस ने मई में अनुमान लगाया था कि ट्रंप प्रशासन और दवा कंपनियों के बीच हुए समझौतों से अगले 10 वर्षों में 529 अरब डॉलर की बचत हो सकती है। हालांकि, खबर के मुताबिक इन समझौतों की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है, इसलिए इस अनुमान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना मुश्किल है। हेम्पस्टेड ने यह चिंता भी जताई कि मौजूदा प्रशासन का कार्यकाल खत्म होने के बाद इन कम कीमतों का क्या होगा। सवाल यह है कि क्या दवाओं की कीमतों में यह कमी आगे भी बनी रहेगी या बाद में कीमतें फिर बढ़ सकती हैं।

क्या सिर्फ मेडिकेड मरीजों को फायदा मिलेगा?

मेडिकेड में शामिल मरीज पहले से ही दवाओं के लिए कुछ डॉलर का मामूली सह-भुगतान करते हैं, इसलिए कीमत कम होने का फायदा सीधे मरीजों के साथ-साथ राज्य सरकारों के बजट को भी हो सकता है। वहीं, फार्मास्युटिकल रिफॉर्म अलायंस के प्रवक्ता और पूर्व रिपब्लिकन सांसद जेडी हेवर्थ ने कहा कि यह प्रगति महत्वपूर्ण है, लेकिन अधूरी है। उनके मुताबिक सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं में शामिल नहीं होने वाले लाखों अमेरिकी भी दवाओं की कम कीमत चाहते हैं। अमेरिका में मरीज की दवा लागत कई चीजों पर निर्भर करती है, जिसमें दवा के सामने मौजूद प्रतिस्पर्धा और बीमा कवरेज शामिल हैं। ज्यादातर लोगों के पास नौकरी, व्यक्तिगत बीमा बाजार या मेडिकेड और मेडिकेयर जैसी सरकारी योजनाओं के जरिए स्वास्थ्य कवरेज है।

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