दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव में मतदान खत्म होने के साथ ही छात्र संगठनों ने जीत-हार का गणित लगाना शुरू कर दिया है। एबीवीपी और एनएसयूआई दोनों ही कई सीटों पर अपने प्रत्याशियों की जीत के दावे कर रहे हैं। हालांकि, अंदरूनी स्तर पर मुकाबला बेहद करीबी बताया जा रहा है। एबीवीपी चारों प्रमुख सीटों पर क्लीन स्वीप का दावा कर रही है, जबकि एनएसयूआई अध्यक्ष और संयुक्त सचिव पद पर खुद को मजबूत स्थिति में मान रही है।
अंतिम नतीजों से पहले सभी की निगाहें पैनल वोटिंग, नोटा, बागी उम्मीदवारों और आइसा को मिले वोटों पर टिकी हैं। छात्र संगठनों से जुड़े लोगों का मानना है कि करीबी मुकाबले में इनका असर परिणाम पर पड़ सकता है। कम मतदान को एबीवीपी अपने पक्ष में मान रही है। संगठन से जुड़े नेताओं का कहना है कि कम मतदान की स्थिति में उसका पारंपरिक कैडर वोट अधिक प्रभावी रह सकता है। प्रचार अभियान की शुरुआत से ही एबीवीपी चारों सीटों पर जीत का दावा करती रही है।