
डॉ. रजनी बगई, सीनियर कंसल्टेंट – गायनेकोलॉजी एवं प्रसूति विज्ञान, नारायण अस्पताल, हावड़ा और चूनावटी
PCOS Lifestyle: पॉलीएंडोक्राइन मेटाबॉलिक ओवेरियन सिंड्रोम (PMOS), जिसे पहले पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम (PCOS) कहा जाता था, एक ऐसी बीमारी है जिसके होने की पूरी वजह अभी साफ नहीं है. इतना जरूर पता है कि शरीर में हार्मोन का संतुलन बिगड़ने से कई तरह की समस्याएं शुरू हो सकती हैं. इससे ओव्यूलेशन में परेशानी, शरीर में एंड्रोजन यानी पुरुष हार्मोन का बढ़ना, इंसुलिन का ठीक से काम न करना और लंबे समय तक सूजन जैसी स्थिति हो सकती है.
इसकी वजह से पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं, चेहरे या शरीर पर ज्यादा बाल आ सकते हैं और मुहांसे भी हो सकते हैं. लंबे समय में इसका असर प्रजनन क्षमता, डायबिटीज और हृदय रोग के जोखिम पर भी पड़ सकता है. कुछ मामलों में कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है.
PMOS में मोटापे का क्या कनेक्शन है?
यह अभी साफ नहीं है कि PMOS की वजह से वजन बढ़ता है या ज्यादा वजन होने से PMOS का खतरा बढ़ता है. हालांकि, PMOS से जूझ रही 30 प्रतिशत से ज्यादा महिलाएं ओवरवेट या मोटापे से ग्रस्त होती हैं. साथ ही, PMOS वाली महिलाओं के लिए वजन कम करना दूसरी महिलाओं की तुलना में मुश्किल हो सकता है.
अच्छी बात यह है कि शरीर का सिर्फ 5-10 प्रतिशत वजन कम होने पर भी इंसुलिन प्रतिरोध और अनियमित पीरियड्स जैसी कई समस्याओं में सुधार देखा गया है. इसलिए आहार और व्यायाम PMOS को मैनेज करने के अहम तरीके हैं.
PMOS में खान-पान क्यों जरूरी है?
खान-पान में बदलाव करके वजन कम करने से PMOS में लंबे समय से बनी सूजन को कम करने और शरीर में बढ़े हुए पुरुष हार्मोन को कम करने में मदद मिल सकती है. हालांकि, अभी तक ऐसा कोई एक खास डाइट प्लान नहीं मिला है, जिसे PMOS के लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद माना जाए.
इसलिए किसी ट्रेंड या फैड डाइट के पीछे भागने के बजाय ऐसा खाना चुनना बेहतर है, जिसे लंबे समय तक आसानी से अपनाया जा सके.
PMOS में व्यायाम का क्या फायदा है?
एरोबिक एक्सरसाइज PMOS वाली महिलाओं में BMI कम करने में मदद कर सकती है. एक अध्ययन में पाया गया कि PMOS वाली महिलाओं के लिए बेहतर स्वास्थ्य परिणाम पाने के लिए हर सप्ताह कम से कम 120 मिनट तेज गति वाला व्यायाम जरूरी हो सकता है.
हालांकि, अभी पर्याप्त सबूत नहीं हैं कि कोई एक खास तरह का व्यायाम बाकी व्यायामों से ज्यादा फायदेमंद है. कुछ अध्ययनों में योग को दूसरे व्यायामों से बेहतर बताया गया है, लेकिन इसके समर्थन में उपलब्ध सबूत बहुत मजबूत नहीं हैं.
PMOS में सकारात्मक सोच भी जरूरी
PMOS से जूझने वाली महिलाओं को वजन बढ़ने, शरीर पर ज्यादा बाल आने और मुहांसों की वजह से अपनी बॉडी इमेज को लेकर परेशानी हो सकती है. इससे आत्मविश्वास कम हो सकता है और रोजाना की लाइफस्टाइल में जरूरी बदलाव करना भी मुश्किल लग सकता है.
इसलिए PMOS को मैनेज करने में आत्मविश्वास बनाए रखना और सकारात्मक सोच रखना भी जरूरी है. जब महिलाओं को यह पता होता है कि उन्हें जो बदलाव करने हैं, वे आसान और लंबे समय तक अपनाए जा सकते हैं, तो उन्हें अपनी दिनचर्या में शामिल करना भी आसान होता है.
इसी वजह से बहुत मुश्किल फैड डाइट या महंगे एक्सरसाइज प्रोग्राम कई बार उल्टा असर डाल सकते हैं.
डाइट और एक्सरसाइज को आसान और टिकाऊ बनाएं
71 देशों में हुए अध्ययनों के आधार पर PMOS के लिए तैयार प्रमाण-आधारित दिशानिर्देशों में सभी महिलाओं के लिए लाइफस्टाइल में बदलाव की सलाह दी गई है. इसमें किसी एक खास डाइट या व्यायाम को जरूरी नहीं बताया गया है.
दिशानिर्देशों के अनुसार, कुछ शारीरिक गतिविधि करना बिल्कुल सक्रिय न रहने से बेहतर है. इसी तरह, स्वस्थ खान-पान के सामान्य नियमों के अनुसार अपनाया गया कोई भी संतुलित आहार स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है.
2023 के प्रमाण-आधारित PCOS दिशानिर्देशों के अनुसार
वजन बढ़ने से रोकने के लिए:
18-64 साल की उम्र में हर सप्ताह कम से कम 150-300 मिनट मध्यम-तीव्रता वाली शारीरिक गतिविधि या 75-150 मिनट तेज गति वाली एरोबिक गतिविधि करने की सलाह दी गई है. इसके साथ सप्ताह में 2 अलग-अलग दिनों में मांसपेशियों को मजबूत करने वाली एक्सरसाइज भी करनी चाहिए.
वजन कम करने के लिए:
हर सप्ताह 250 मिनट मध्यम-तीव्रता वाली गतिविधि या 150 मिनट तेज-तीव्रता वाली गतिविधि का लक्ष्य रखा जा सकता है. इसके साथ, संभव हो तो सप्ताह में 2 अलग-अलग दिनों में मांसपेशियों को मजबूत करने वाली एक्सरसाइज करनी चाहिए.
किशोरों के लिए:
हर दिन कम से कम 60 मिनट मध्यम से तेज गति वाली शारीरिक गतिविधि का लक्ष्य रखना चाहिए. इसमें सप्ताह में कम से कम 3 बार मांसपेशियों और हड्डियों को मजबूत करने वाली गतिविधियां शामिल होनी चाहिए.
मध्यम और तेज व्यायाम में क्या अंतर है?
मध्यम-तीव्रता वाली गतिविधि का मतलब ऐसा व्यायाम है, जिससे आपकी हार्ट रेट अधिकतम स्तर के करीब 50-60 प्रतिशत तक पहुंच जाए. इस दौरान आप बात कर सकते हैं, लेकिन गाना नहीं गा पाएंगे.
वहीं तेज-तीव्रता वाले व्यायाम में हार्ट रेट करीब 70-90 प्रतिशत तक पहुंच सकता है. इस दौरान सांस लेने के लिए रुकने से पहले आप सिर्फ कुछ शब्द ही बोल पाएंगे.
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