विपक्षी खेमे में बढ़ते मतभेदों के बीच राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। डीएमके की वरिष्ठ नेता कनिमोझी ने कोलकाता में टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी से उनके आवास पर बंद कमरे में मुलाकात की। इससे पहले कनिमोझी उद्धव ठाकरे और शरद पवार से भी चर्चा कर चुकी हैं। ऐसे में इन क्षेत्रीय दलों के बीच बढ़ते संपर्क को लेकर सियासी गलियारों में नए राजनीतिक समीकरणों की अटकलें तेज हो गई हैं।
डीएमके की वरिष्ठ नेता कनिमोझी ने गुरुवार को कोलकाता में पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात की। दोनों के बीच यह बैठक दक्षिण कोलकाता के कालीघाट स्थित ममता के आवास पर हुई।टीएमसी के एक नेता ने बताया कि लोकसभा सांसद कनिमोझी ने ममता के साथ उनके आवास पर बंद कमरे में बैठक की। उन्होंने कहा, कनिमोझी और ममता बनर्जी के बीच कई मुद्दों पर चर्चा हुई।
कनिमोझि इससे पहले उद्धव और पवार से कर चुकी हैं मुलाकात
- कनिमोझी की ममता से यह मुलाकात मुंबई में शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और दिल्ली में एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार के साथ चर्चा के कुछ दिनों बाद हुई है।
- डीएमके और कांग्रेस के बीच तनाव तथा विपक्षी इंडिया गठबंधन के कई क्षेत्रीय सहयोगियों के बीच मतभेदों के बीच कनिमोझी का यह संपर्क चर्चा में है।
टीएमसी-कांग्रेस के रिश्तों में तनाव
टीएमसी और कांग्रेस राष्ट्रीय स्तर पर इंडिया गठबंधन का हिस्सा हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल में दोनों दलों के रिश्ते तनावपूर्ण रहे हैं। हाल ही में छह अक्तूबर को होने वाले उपचुनाव को लेकर भी दोनों पार्टियों के बीच तनातनी सामने आई है। राज्य कांग्रेस ने दावा किया था कि टीएमसी ने नंदीग्राम सीट उसके लिए छोड़ने के प्रस्ताव के साथ केंद्रीय नेतृत्व से संपर्क किया था। हालांकि, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने इस दावे को खारिज कर दिया।
डीएमके और कांग्रेस का भी छूटा साथ
उधर तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के बाद डीएमके और कांग्रेस के रिश्तों में भी तनाव आया है। कांग्रेस अब अभिनेता से नेता बने सी. जोसेफ विजय की टीवीके के नेतृत्व वाले सत्ताधारी गठबंधन का हिस्सा है, जबकि डीएमके विपक्ष में है। डीएमके ने जून में इंडिया गठबंधन की बैठक में हिस्सा नहीं लिया था। इसके बाद से पार्टी ने कांग्रेस के प्रति अधिक टकराव वाला रुख अपनाया है। इस पृष्ठभूमि में कनिमोझी की बैठकों ने कांग्रेस के नेतृत्व वाले ढांचे से बाहर की पार्टियों के बीच तालमेल मजबूत करने के प्रयासों को लेकर अटकलों को जन्म दिया है। हालांकि, अभी ऐसा कोई आधिकारिक संकेत नहीं है कि इन चर्चाओं का उद्देश्य कोई नया राजनीतिक समूह बनाना था।
टीएमसी में भी असंतोष का दौर
टीएमसी भी राजनीतिक उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है। पश्चिम बंगाल में भाजपा के सत्ता में आने के बाद उसका 15 साल का शासन खत्म हो गया है। पार्टी को राज्य विधानसभा के साथ-साथ अपने संसदीय सदस्यों के बीच भी असंतोष का सामना करना पड़ रहा है।

