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बांग्लादेश यूनिवर्सिटी में मुजीबुर्रहमान की जगह जिन्ना, विरासत पर वार से बवाल

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बांग्लादेश के ढाका यूनिवर्सिटी में पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर लगाने को लेकर जमकर हंगामा हुआ. यूनिवर्सिटी के सेंट्रल स्टूडेंट्स यूनियन (DUCSU) संग्रहालय से बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर्रहमान की कई तस्वीरों को हटाकर उनकी जगह मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीरें लगा दी गईं, जिसके बाद छात्र संघों ने विरोध प्रदर्शन किया और कार्रवाई की चेतावनी दी. छात्रों ने जिन्ना की एक तस्वीर भी फाड़ दी. DUCSU को बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी के छात्र संगठन ‘इस्लामी छात्र शिबिर’ का समर्थन प्राप्त है.

बांग्लादेशी न्यूज आउटलेट्स प्रोथोम आलो की रिपोर्ट के मुताबिक, डीयूसीएसयू संग्रहालय को रविवार को डीयूसीएसयू की मुक्ति युद्ध और जन आंदोलन सचिव फातिमा तस्नीम जुमा ने जनता के लिए खोल दिया. बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर्रहमान अब सत्ता से बेदखल शेख हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग सरकार के विरोधियों के लगातार निशाने पर रहे हैं. विद्रोह के दौरान खेश हसीना की सत्ता से बेदखल होने के बाद बांग्लादेश भर में मुजीबुर्रहमान की कई मूर्तियों को तोड़फोड़ कर नष्ट कर दिया गया.

मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने बांग्लादेश के राष्ट्रपति कार्यालय से मुजीबुर्रहमान की तस्वीर को हटा दिया और देश के नोट से उनकी तस्वीर हटाने के लिए कदम उठाए थे. DUCSU संग्रहालय से शेख मुजीबुर्रहमान की तस्वीरों को हटा दी गई है, जो बांग्लादेश के स्वतंत्रता संग्राम में उनकी भूमिका को दर्शाती थी. इन हटाई गई तस्वीरों में 1952 का भाषा आंदोलन, 1954 का युनाइटेड फ्रंट चुनाव, 1966 का छह सूत्री आंदोलन, 1968 का अगरतला षड्यंत्र मामला, 1969 का जन आंदोलन और 1970 का आम चुनाव शामिल हैं.

इसके अलावा 7 मार्च 1971 के उनके उस ऐतिहासिक भाषण की तस्वीर भी हटा दी गई है, जिसमें उन्होंने बांग्लादेश की आजादी का ऐलान किया था. अब संग्रहालय में मुजीब से जुड़ी केवल 1974 में उनके बेटों की शादी की तस्वीरें और अखबारों की कुछ फ्रेम की हुई कतरनें ही बची हैं. दूसरी तरफ, संग्रहालय में पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की तीन तस्वीरें लगाई गई हैं. इनमें 21 मार्च 1948 को दिया गया उनका वह भाषण शामिल है जिसमें उन्होंने उर्दू को पाकिस्तान की एकमात्र राष्ट्रभाषा घोषित किया था.

साथ ही 1940 के लाहौर ऑल इंडिया मुस्लिम लीग सम्मेलन और 1970 के चुनाव पर ‘डॉन’ अखबार की एक रिपोर्ट की तस्वीर भी लगाई गई है. DUCSU की फातिमा तसनीम जुमा के अनुसार, 5 अगस्त 2024 के बाद ‘फासीवाद का प्रतीक’ मानी जाने वाली हस्तियों की तस्वीरें हटाई गईं, जबकि जिन्ना की तस्वीरें केवल इतिहास को दर्शाने के लिए लगाई गई हैं, न कि उनकी तारीफ करने के लिए. वहीं एक कर्मचारी के अनुसार, 2025 के चुनाव में युनाइटेड स्टूडेंट्स अलायंस और इस्लामी छात्र शिबिर के नियंत्रण में आने के बाद मुजीब की बची हुई तस्वीरें भी हटा दी गईं.

ढाका यूनिवर्सिटी सेंट्रल स्टूडेंट्स यूनियन (DUCSU) संग्रहालय में शेख मुजीबुर्रहमान की तस्वीरों की जगह मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीरें लगाने को लेकर छात्रों में गुस्सा फैल गया. बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के छात्र संगठन ‘छात्र दल’ ने जिन्ना की तस्वीरें लगाने की कड़ी निंदा की. BNP ने कहा कि शिबिर के नियंत्रण वाला DUCSU छात्रों की लोकतांत्रिक भावनाओं को दरकिनार कर अपना पाकिस्तान प्रेम दिखा रहा है. इसके अलावा कार्यकर्ताओं ने परिसर में जमात-ए-इस्लामी के नेता गुलाम आजम को जूतों से पीटे जाने वाली एक तस्वीर भी टांग दी.

यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर मोहम्मद तंजीमुद्दीन खान ने कहा कि रिनोवेशन के नाम पर शेख मुजीब की तस्वीरें हटाना बांग्लादेश के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी महत्वपूर्ण हस्तियों को मिटाने और राजनीतिक स्वार्थ के लिए नया इतिहास गढ़ने की कोशिश है. यूनिवर्सिटी प्रशासन ने जिन्ना की तस्वीर लगाने और बिना अनुमति के स्मारक बनाने जैसे मामलों में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही है. प्रशासन ने DUCSU की इस मनमानी को परिसर में एक समानांतर प्रशासन चलाने का प्रयास माना है और मामले की जांच के लिए तीन अलग-अलग समितियां गठित की हैं.

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