ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने शुक्रवार को भारतीय धार्मिक नेताओं, विद्वानों और व्यापार जगत के दिग्गजों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि ईरान किसी भी तरह के जुल्म के आगे नहीं झुकेगा।
ईरानी राष्ट्रपति ने क्या कहा?
मसूद पेजेशकियन के बयान का अनुवाद करते हुए अनुवादक ने कहा कि ईरान दूसरे देशों के साथ अपने अनुभव साझा करना चाहता है। इसका मकसद ऐसा समाज बनाना है, जहां सभी लोग आजादी से रहें। किसी पर जुल्म न हो। किसी का शोषण न हो।
उन्होंने कहा कि ईरान इसी दिशा में काम कर रहा है। लेकिन अमेरिका ऐसा नहीं चाहता। इसकी वजह यह है कि ईरान स्वतंत्र रहना चाहता है। अमेरिका पूरी कोशिश करता है कि ईरान अपने लोगों को सेवाएं न दे सके।
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ईरानी राष्ट्रपति के मुताबिक, ईरान में क्रांति के सफल होने के बाद से ही देश में फूट डालने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि ईरान पर प्रतिबंध लगाए गए। समाज में मतभेद पैदा करने की कोशिश हुई। लोगों के बीच विवाद बढ़ाने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि इसके पीछे मकसद अपने हितों को आगे बढ़ाना है।
उन्होंने कहा कि ईरान का मानना है कि सभी लोग बराबर हैं। सभी एक-दूसरे के भाई हैं। सभी लोगों के अधिकार बराबर हैं। लोग शांति से साथ रह सकते हैं। इसके लिए न्याय जरूरी है। उन्होंने कहा कि ईरान इसी व्यवस्था की मांग कर रहा है। लेकिन उनके मुताबिक, दूसरी तरफ से ऐसा नहीं किया जा रहा है।
अमेरिका और इस्राइल पर क्या कहा?
उन्होंने साफ कहा कि ईरान इसके आगे नहीं झुकेगा। पेजेशकियन ने कहा कि ईरान सच्चाई और न्याय की तलाश में है। इसलिए वह दबाव और अहंकार के आगे भी नहीं झुकेगा।
मसूद पेजेशकियन ने कहा कि आज ईरान एक साथ इस्राइल और अमेरिका के खिलाफ खड़ा होने में सफल रहा है। उन्होंने कहा कि दोनों देश ईरान पर दबाव बनाना चाहते हैं। लेकिन ईरान दबाव में नहीं आना चाहता।उन्होंने कहा कि ईरान कभी उनके सामने घुटने नहीं टेकता। अगर ईरान को धक्का दिया जाएगा, तो वह जवाब देगा।
मानवाधिकारों के दावे पर क्या सवाल उठाया?
उन्होंने कहा कि अमेरिका और उसके सहयोगी खुद को मानवाधिकारों का समर्थक बताते हैं। लेकिन असल में आतंक फैलाने वाले वही लोग हैं। आधुनिक तकनीक की मदद से एक ही पल में 168 स्कूली बच्चों को मार दिया गया। अगर ईरान को आतंकवादी देश कहा जाता है, तो उन लोगों के बारे में क्या कहा जाए जो इंसानों को मारते हैं?
सैनिकों से ही लड़ने की बात क्यों कही?
उन्होंने वैज्ञानिकों को निशाना बनाने और स्कूलों तथा अस्पतालों पर हमले का भी जिक्र किया। उन्होंने सवाल किया कि अगर लड़ना है, तो सैनिकों और सेना के जवानों से लड़िए। उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचे और आम लोगों की रोजी-रोटी को निशाना क्यों बनाया जाता है? ईरान की जनता आत्मसमर्पण नहीं करेगी। ईरान मानव मूल्यों में भरोसा करता है। सभी लोगों के अधिकार बराबर हैं।
भारत की मेजबानी पर क्या कहा?
ईरानी राष्ट्रपति ने सबसे पहले भारत सरकार और प्रधानमंत्री का धन्यवाद किया। उन्होंने भारत की अच्छी मेजबानी की तारीफ की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच बहुत अच्छी बातचीत हुई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों देशों के बीच हुई बातचीत और संबंध आगे सहयोग का रास्ता खोलेंगे। भारत और ईरान मिलकर कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा सकते हैं। इनमें संस्कृति, तकनीक, व्यापार, विज्ञान और अर्थव्यवस्था शामिल हैं। दोनों देश इन क्षेत्रों में अपने पुराने संबंधों को फिर से मजबूत कर सकते हैं।


