उत्तर प्रदेश में अगले साल यानी 2027 में विधानसभा के चुनाव होने हैं। इन चुनावों को लेकर अभी से राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। आने वाले चुनाव में जहां भाजपा लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की कोशिश करेगी, वहीं विपक्ष सत्ता परिवर्तन की उम्मीदों के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रहा है। पक्ष और विपक्ष दोनों मतदाताओं को लुभाने में लग गए हैं। राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। इसी चुनावी सरगर्मी के बीच, हम आपको उत्तर प्रदेश की हर विधानसभा सीट के इतिहास, सामाजिक ताने-बाने और उसके राजनीतिक परिदृश्य के बारे में विस्तार से बता रहे हैं। इसी कड़ी में आज चर्चा बाराबंकी जिले की कुर्सी विधानसभा सीट की। आइए, जानते हैं इस सीट का पूरा सियासी गणित और इतिहास।
पहले जानते हैं कुर्सी विधानसभा सीट के बारे में
उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में से एक जिला बाराबंकी है। जिले में कुल 6 विधानसभा सीटें हैं। इनमें- कुर्सी, रामनगर, बाराबंकी, जैदपुर, दरियाबाद और हैदरगढ़ शामिल हैं। ‘सीट का समीकरण’ की आज की कड़ी में हम कुर्सी विधानसभा सीट की बात करेंगे। बाराबंकी जिले की कुर्सी विधानसभा सीट साल 2008 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी। यहां पहला चुनाव 2012 में हुआ था। यहां के पहले विधायक फरीद महफूज किदवई बने थे। उन्होंने समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़कर जीत हासिल की थी।