लद्दाख के भविष्य को लेकर केंद्र के साथ चल रही बातचीत अब केवल राज्य के दर्जे, सांविधानिक सुरक्षा व स्थानीय अधिकारों की मांग तक सीमित नहीं रह गई है। आज दिल्ली में होने वाली केंद्र-लद्दाख वार्ता से पहले 11 प्रमुख बौद्ध धार्मिक, राजनीतिक और सामाजिक नेताओं ने गृह मंत्री अमित शाह से अपील की है कि पूर्व सांसद थुपस्तान छेवांग व पूर्व लेह हिल काउंसिल के चेयरमैन ताशी ग्यालसन को भी वार्ता में शामिल किया जाए।


लद्दाख गोंपा एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष थिकसे रिंपोछे नवांग चंबा स्टैनजिन के अनुसार यह बातचीत में केवल दो व्यक्तियों को प्रतिनिधित्व देने का मामला नहीं है। यह लद्दाख में विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक धाराओं को एक साथ लेकर चलने और भविष्य में बनने वाली किसी भी सहमति को व्यापक स्वीकार्यता दिलाने का सवाल है। इसी के लिए हम सभी प्रयासरत हैं।
नौ सितंबर की बैठक बेहतर महत्वपूर्ण है। केंद्र और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच लंबे समय से चल रही बातचीत अब ठोस राजनीतिक और संवैधानिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ रही है। इससे पहले जुलाई और अगस्त में लेह में बैठकें हो चुकी हैं।
थुपस्तान छेवांग लद्दाख की राजनीति के पुराने और प्रभावशाली चेहरों में से हैं। वह पूर्व सांसद होने के साथ लद्दाख की राजनीतिक-सामाजिक मांगों को केंद्र के सामने रखने वाली प्रक्रियाओं से लंबे समय से जुड़े रहे हैं। 11 नेताओं के मुताबिक वह पहले की उच्चाधिकार प्राप्त समिति से जुड़ी वार्ताओं और लद्दाख की संवैधानिक सुरक्षा से संबंधित चर्चाओं के प्रत्यक्ष जानकार हैं। इसलिए उनकी मौजूदगी को वार्ता की गंभीरता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ताशी ग्यालसन को शामिल करने की मांग की अहमियत
ताशी ग्यालसन की मौजूदगी की मांग का राजनीतिक महत्व अलग है। वह लेह हिल काउंसिल के पूर्व प्रमुख और भाजपा के वरिष्ठ नेता रहे हैं। 11 नेताओं का तर्क है कि यदि करगिल की तरफ से कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस से जुड़े प्रतिनिधि बातचीत में हैं, तो लेह की तरफ से भाजपा की राजनीतिक धारा का प्रतिनिधित्व भी होना चाहिए। इससे बातचीत में राजनीतिक संतुलन का संदेश जाएगा।
छेवांग-ग्यालसन : लद्दाख की दो राजनीतिक धाराएं
थुपस्तान छेवांग लद्दाख की पुरानी स्वायत्तता और राजनीतिक अधिकारों की आवाज के प्रमुख चेहरों में रहे हैं। लेह हिल काउंसिल के शुरुआती नेतृत्व से लेकर दो बार लोकसभा सदस्य रहने तक उनका लंबा राजनीतिक अनुभव रहा है। केंद्र के साथ संवाद और लद्दाख की संवैधानिक पहचान से जुड़े मुद्दों पर उनकी पकड़ उन्हें आज भी महत्वपूर्ण बनाती है।
ताशी ग्यालसन नई पीढ़ी के प्रभावशाली राजनीतिक चेहरों में से हैं। वह लेह हिल काउंसिल के चेयरमैन एवं मुख्य कार्यकारी पार्षद रहे हैं और भाजपा से जुड़े हैं। स्थानीय शासन, विकास और केंद्र के साथ संस्थागत संवाद का उन्हें प्रत्यक्ष अनुभव है। दोनों की मौजूदगी लद्दाख की दो धाराओं को जोड़ती है।
खास है आज की बैठक
नई दिल्ली में केंद्र और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच होने वाली वार्ता बेहद महत्वपूर्ण है। बैठक में स्थानीय लोगों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व, भूमि और रोजगार की सुरक्षा, सांस्कृतिक पहचान तथा स्वायत्त शासन को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर आगे की दिशा तय हो सकती है। इस बैठक का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि लद्दाख में केंद्र के साथ बातचीत और आंदोलन-दोनों समानांतर चल रहे हैं। लेह एपेक्स बॉडी ने वार्ता को अवसर देते हुए अपने विरोध कार्यक्रम स्थगित किए हैं।