लंदन में आरएसएस के कार्यक्रम सेलिब्रेशन ऑफ वननेस इवेंट में संगठन के चीफ मोहन भागवत ने समाज की एकता पर जोर देते हुए संबोधन दिया. इस दौरान उन्होंने कहा कि समाज जब संगठित हो जाएगा, तो बाकी सबकुछ अपने आप हो जाएगा. मोहन भागवत 17 दिन के विदेश दौरे पर हैं. आरएसएस के 100 साल पूरे होने पर दुनिया के चुनिंदा देशों में संघ के कार्यक्रम में शामिल हो रहे हैं.
इसी कड़ी में लंदन में आयोजित कार्यक्रम में बोलेते हुए उन्होंने रविवार को अपनी बात रखी. भागवत ने कहा, ‘सातवीं पीढ़ी से पहले हिंदू समाज को संगठित करने का काम पूरा हो जाना चाहिए. अब आरएसएस हर जगह स्वीकार किया जाता है. हमारे विरोधी भी हमारे काम की उपयोगिता को समझते हैं और फिर ऐसा समाज भी बाकी चीजों का ध्यान रखेगा. हमें उन पर जोर देना चाहिए, जो हमें जोड़ती हैं, न कि उन पर जो हमें बांटती है.’
RSS किसे मानता है स्वयंसेवक? मोहन भागवत ने बताया
आरएसएस चीफ ने कहा, ‘अगर आप समाज की भलाई के लिए ईमानदारी और निस्वार्थ भाव से काम कर रहे हैं, तो हम आपको स्वयंसेवक मानते हैं, भले ही आपका हमसे कोई संवाद या जुड़ाव न हो. आप हमारे साथ काम न करते हों, आपको यह भी नहीं पता हो कि आरएसएस क्या मतलब है. आज आरएसएस के स्वयंसेवक हर क्षेत्र में सेवा में कर रहे हैं. यहां तक की राजनीति में भी. इन सभी क्षेत्रों में हम लोगों से जुड़ रहे हैं. ईमानदारी से उनकी सेवा कर रहे हैं. जहां कोई काम नहीं कर रहा, वहां हम काम कर रहे हैं.’
शताब्दी वर्ष के मौके पर 17 दिवसीय विदेश दौरे पर हैं भागवत
आरएसएस चीफ मोहन भागवत तीन देशों के 17 दिवसीय दौरे पर हैं. उनकी यात्रा का पहला पड़ाव अमेरिका, दूसरा कनाडा और तीसरा ब्रिटेन है. यह संघ की शताब्दी वर्ष के अवसर पर उनका पहला बड़ा इंटरनेशनल दौरा है. लंदन से पहले मोहन भागवत ने अमेरिका के न्यूयॉर्क (मैडिस्न स्क्वायर गार्डन) में यूनिवर्सल वननेस सम्मेलन को संबोधित किया. कनाडा के टोरंटो में हिंदु विश्व बंधु सम्मेलन में हिस्सा ले चुके हैं. अब वह अपने दौरे के आखिरी पड़ाव के तहत लंदन में मौजूद हैं.


